वंदे मातरम पर जमीअत ने कहा- जबरदस्ती ठीक नहीं:मुल्क से मोहब्बत ईमान

Updated on 15-02-2026 08:25 PM
भोपाल, जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने वंदे मातरम गीत को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गीत पर शुरू से ही आपत्तियां हैं। मुसलमानों की तरफ से हमेशा इस पर ऐतराज किया गया है।

इसके छंद पर मुल्क से मोहब्बत करना हमारा ईमान है। हम मुल्क से मोहब्बत करते हैं, प्यार करते हैं, प्रेम करते हैं। हम अपने मां-बाप से मोहब्बत करते हैं, प्यार करते हैं, प्रेम करते हैं। क्योंकि प्रेम करने में और पूजने में जमीन आसमान का फर्क है।

हम चाहते हैं कि ये जो पूजनीय लफ्ज है, हम अल्लाह, एक ईश्वर, एक गॉड, एक अल्लाह के अलावा किसी को भी इबादत नहीं करते और यह पूरी दुनिया अच्छी तरह जानती है कि मजहब इस्लाम का क्या मौकफ है। मुसलमानों का क्या मौकफ है और भारत के संविधान ने हमको क्या आजादी दी हुई है। ये भारत सरकार और प्रदेश सरकार भी अच्छी तरह जानती है। जबरदस्ती करने की कोशिश की जाती है। अब भी कानून तो नहीं बनाया है, बस ऑर्डर निकालते रहते हैं।

गीत का मतलब बड़े-बड़े लोग नहीं समझते

उन्होंने कहा, “सूरते हाल ये है कि बड़े-बड़े लोग वंदे मातरम के मतलब को नहीं समझते, जन गण मन के मतलब को नहीं समझते। यहां के एक बड़े जिम्मेदार से पत्रकार ने पूछा कि वंदे मातरम सुनाओ तो वो नहीं सुना पाए। तो मेरा यहां में मुतालबा है कि भारत सरकार को गौर करना चाहिए कि ये बंगाली भाषा के गीत हैं और भारत में हिंदी भाषा पूरे भारत में बोली जाती है।

ज्यादातर लोग हिंदी भाषा बोलते हैं। तो एक बेहतरीन गीत का नवनिर्माण भारत के लिए करना चाहिए, ताकि सब लोगों को कुबूल हो और हिंदी में हो। एक बड़ी उच्च स्तरीय कमेटी बनाना चाहिए। बड़े-बड़े विद्वानों को, शायरों को, कवियों को शामिल करके एक अच्छा गीत लिखा जाना चाहिए।

सारे जहां से अच्छा की तरह सर्वमान्य गीत बने

हाजी मोहम्मद हारून ने कहा, जैसे अल्लामा इकबाल ने गीत लिखा था, सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा, ये गीत भी आज भारत में गाया जाता है, बजाया जाता है, फौज के अंदर गाया जाता है और भारत के हर कोने पे ये गीत बजाया जाता है। या तो इस गीत को भारत का गीत मान लिया जाए या कोई और गीत ऐसा बनाया जाए, क्योंकि यह जो दोनों गीत है, यह हमारी समझ में नहीं आते।

बहुत सारे हिंदू भाइयों की भी समझ में नहीं आते। तो मैं तो यहां ये मुतालबा करूंगा कि कोई अभी भी पढ़े-लिखे लोगों की कमी नहीं है। जब कंट्रोवर्सी है इस गीत पर, इस गीत पे बहुत सारे लोगों का ऐतराज है, भारत के संविधान ने जो हमें आजादी दी है या उसके भी खिलाफ है, तो हमारा मुतालबा है कि जबरदस्ती किसी पे किया जाए। जो पढ़ना चाहते हैं पढ़े और जो नहीं पढ़ना चाहते हैं ना पढ़े। एक अच्छे गीत के नवनिर्माण होना चाहिए।


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