मध्यप्रदेश फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्माण के लिए भविष्य का केंद्र

Updated on 02-03-2024 07:20 PM

रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में अपॉर्चुनिटीज इन फार्मास्यूटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेज इन एम.पी. विषय पर शनिवार को हुए सत्र में मध्यप्रदेश में फार्मास्यूटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेज निर्माण क्षेत्र में मध्यप्रदेश में बेहतर अवसर पर विस्तृत चर्चा हुई। सत्र में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान, सचिव स्वास्थ्य श्री सुदाम खाड़े, सीओओ पी.डी. हिंदुजा हॉस्पिटल्स, श्री जॉय चक्रवर्ती, मैनेजिंग डायरेक्टर एंड सीइओ आईपीसीए लैबोरेट्रीज लिमिटेड श्री अजीत कुमार जैन, ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीजी पॉलिमर्स मेडिकल डिवाइसेज प्राइवेट लिमिटेड श्री विष्णु जाजू, सीईओ रिनी लाइफ साइंसेज श्री अक्षत कोर्डिया, एनक्यूब एथिकल्स के श्री विक्रांत पराशर तथा बड़ी संख्या में निवेशक उपस्थित थे।

सत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र के बड़े उद्योगपतियों ने प्रदेश में इस व्यवसाय के लिए उपयुक्त परिस्थितियों पर प्रकाश डाला और कहा कि मध्यप्रदेश फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्माण क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। उन्नत प्रौद्योगिकी और सरल निवेश नीति के साथ म.प्र. इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी वैश्विक पहचान बना रहा है।

फार्मास्युटिकल पावर हाउस

सत्र में बताया गया कि वैश्विक फार्मास्युटिकल बाजार में भारत का प्रभुत्व निर्विवाद है और इस परिदृश्य में मध्यप्रदेश अपने मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के साथ खड़ा है। राज्य में 270 से अधिक फार्मास्युटिकल इकाइयों का नेटवर्क है, जिसमें 39 एपीआई/बल्क ड्रग विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं, जिसमें 50 से अधिक इकाइयां डब्ल्यूएचओ-जीएमपी मानकों का पालन करती हैं। ये प्रतिष्ठान न केवल घरेलू बाजार की पूर्ति कर रहे हैं, बल्कि दुनिया भर के 160 से अधिक देशों में अपने उत्पादों का निर्यात भी कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2022 में राज्य के निर्यात में इस क्षेत्र का योगदान बढ़कर 20.5% हो गया, जो आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में अत्यंत सहायक है। प्रदेश की फार्मास्युटिकल शक्ति फार्मा पार्कों के विकास से और भी बढ़ गई है। ये पार्क नवाचार के लिए इन्क्यूबेटर के रूप में काम करेंगे। ये अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और अनुसंधान विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करेंगे। इसके अलावा सन फार्मा, ल्यूपिन, ग्लेनमार्क, सिप्ला, माइलान, डाबर, अरिस्टो, आईपीसीए जैसी दिग्गज ड्रग कंपनियां राज्य में अपना परिचालन शुरू कर रही हैं। मध्यप्रदेश वैश्विक मंच में एक फार्मास्युटिकल पावर हाउस के रूप में खुद को मजबूत कर रहा है। वर्ष 2030 तक भारत के फार्मा उत्पादों का लगभग 50 प्रतिशत मध्यप्रदेश से निर्यात करने की कार्ययोजना बनाई गई है।

चिकित्सा उपकरण विनिर्माण केंद्र

सत्र में बताया गया कि चिकित्सा उपकरणों के वैश्विक बाजार में तेजी देखी जा रही है और भारत 'मेक इन इंडिया' पहल से इस क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और चिकित्सा को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा है। डिवाइसेस पार्क योजना के तहत राज्य सरकार बड़े पैमाने पर विनिर्माण को प्रोत्साहित कर रही है और उप-क्षेत्रों में निवेश की सुविधा प्रदान कर रही है।

भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित चार मेडिकल डिवाइस (एमडी) पार्कों में से एक मध्यप्रदेश में स्थापित किया गया है, जो अपने मौजूदा इंजीनियरिंग और प्लॉस्टिक इको सिस्टम के साथ चिकित्सा उपकरणों के निर्माण केंद्र के रूप में राज्य के तेज उद्भव को बताता है। फार्मास्यूटिकल्स में अपनी प्रगति के अनुरूप मध्यप्रदेश तेजी से खुद को चिकित्सा उपकरण उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। विशाल विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड, उज्जैन में 360 एकड़ में फैले मेडिकल डिवाइस पार्क और सस्ती भूमि और बुनियादी ढांचे की पेशकश राज्य के समर्थन का द्योतक है। मेडिकल इमेजिंग, इम्प्लांट मैन्युफैक्चरिंग, सर्जिकल उपकरण और पहनने योग्य वस्तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, मध्यप्रदेश नवाचार और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है।

सत्र में बताया गया कि फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन में मध्यप्रदेश का उभरना नवाचार, निवेश और समावेशी विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। एक अनुकूल इकोसिस्टम, दूरदर्शी और सरल नीतियों और रणनीतिक पहल के साथ मध्यप्रदेश भारत के औद्योगिक आख्यान में नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है, जो निवेशकों और हितधारकों को एक स्वस्थ और अधिक समृद्ध भविष्य के लिए प्रेरित करेगा।


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