50 साल पुराने डेढ़ लाख पेड़ काटे
प्रो. राजचंद्रन की वर्ष 2016 की रिपोर्ट में प्रकाशित शोध, गूगल इमेजनरी और अन्य सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से कम हो रहे ग्रीन बेल्ट को समझ सकते हैं। इसके लिए शहर को 15 प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया और तीन सड़कों (बीआरटीएस होशंगाबाद रोड, कलियासोत डेम की ओर जाने वाली रोड एवं नार्थ टीटी नगर की स्मार्ट रोड) को सैंपल के रूप में लिया गया। इन सड़कों के पास मौजूद प्रमुख 11 इलाकों के 345 एकड़ क्षेत्र का विश्लेषण करने पर पता चला कि 10 वर्ष में यहां की हरियाली पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है। सिर्फ 11 क्षेत्र में ही 50 साल पुराने 1.55 लाख से अधिक पेड़ काटे गए।
पेड़ो का विस्थापन भी सफल नहीं हुआ
विकास के नाम पर पेड़ों की बलि दी जा रही है। हालांकि, इन पेड़ों को विस्थापित कर कलियासोत, केरवा व चंदनपुरा आदि जंगलों में लगाने के दावे किए गए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से इसमें भी सफलता नहीं मिली। इन पेड़ों ने कुछ ही दिनों में दम तोड़ दिया। जबकि अधिकारी पेड़ों के बदले चार गुना तक पौधे लगाने के दावा करते रहे हैं, लेकिन जब ये बड़े होकर पेड़ बनेंगे तब तक तो पर्यावरण का काफी नुकसान हो चुका होगा। शहर की हरियाली धीरे-धीरे उजड़ जाएगी।
इन परियोजनाओं की बलि चढ़े पेड़
स्मार्ट सिटी के निर्माण में - 6000
बीआरटीएस कारिडोर बनाने - 3000
विधायक आवास बनाने - 1150
सिंगारचोली सड़क निर्माण और चौड़ीकरण - 1800
हबीबगंज स्टेशन निर्माण - 150
खटलापुरा से एमवीएम कालेज तक सड़क चौड़ीकरण - 200
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए - 3000
कोलार सिक्सलेन - 800