बच्चियों में मोबाइल एडिक्शन
2019 में कोविड महामारी के दौरान पिता ने बच्चियों को पढ़ाई के लिए मोबाइल दिए थे। लेकिन पत्नियों की कम पढ़ाई और भूलने की समस्या के चलते बच्चियों पर कोई निगरानी नहीं हो सकी। वे घंटों मोबाइल पर रील्स देखती रहतीं और कमरे से बाहर नहीं निकलतीं। पिता की तरफ से भी कोई ध्यान नहीं दिया गया, क्योंकि उन्होंने बच्चियों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी पत्नियों पर डाल दी थी। जब मोबाइल की लत चरम पर पहुंच गई तो पिता ने छह महीने पहले एक मोबाइल छीनकर बेच दिया और घटना से 15 दिन पहले दूसरा भी। बच्चियां यह बर्दाश्त नहीं कर पाईं और सुसाइड कर लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में माता-पिता की स्वास्थ्य समस्याएं बच्चियों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं।पिता की आर्थिक तंगी और भोग-विलास भरा जीवन
पूछताछ से यह भी पता चला कि पिता का जीवन भोग-विलास से भरा था, जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। उन्होंने ऑफिस वाले फ्लैट का किराया छह महीने से और रहने वाले फ्लैट का तीन महीने से नहीं दिया था। मीडिया को दिए बयान में पिता ने अपनी आर्थिक स्थिति को ठीक बताया था, लेकिन जांच में यह झूठ साबित हो रहा है।पुलिस के पास अभी कई सवालों के जवाब नहीं हैं, जैसे कि पत्नियों की बीमारी का इलाज क्यों नहीं कराया गया और बच्चियों की लत पर पहले क्यों ध्यान नहीं दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
