भोपाल। पूर्व राज्यपाल व कांग्रेस वयोयुद्ध नेता अजीज कुरैशी का 82 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को भोपाल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें अशोका होटल के पीछे कब्रिस्तान में सुपर्दे खाक किया गया। उनके निधन पर कांग्रेसियों सहित शहर के गणमान्य लोगों ने शोक जताया।
ऐसे विरले ही नेता होते हैं, जो अधिकारों के लिए पार्टी संगठन से लड़ जाएं। उनमें से एक थे अजीज कुरैशी। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के करीबी रहे। कुरैशी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मिजोरम के राज्यपाल भी रहे। वह 1984 से 1989 तक लोकसभा सदस्य भी रहे। कांग्रेस संगठन में भी वह विभिन्न पदों पर रहे कुरैशी। जब बात अधिकारों की आ जाती थी तो, उनका अड़ियल स्वभाव देखने को मिलता था। कई बार आम कार्यकर्ताओं के हक की बात पार्टी के आला कमान नेताओं के समक्ष बेबाकी से रखते थे।
भोपाल विवि बनवाने में रही अहम भूमिका - पीसी शर्मा
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा अजीज कुरैशी का एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि भोपाल विश्वविद्यालय बनवाने में उनका अहम योगदान रहा। अलग-अलग छात्र संगठनों को एकजुट करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय कराने के लिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से बात की। विश्वविद्यालय के नामकरण में उनका योगदान रहा।
संगठन के लिए खपा दिया जीवन - कैलाश मिश्रा
वहीं, कांग्रेस के पूर्व भोपाल जिलाध्यक्ष कैलाश मिश्रा बताते हैं कि अजीज भाई ने पार्टी संगठन के लिए अपना पूरा जीवन दिया। उन्होंने विवाह नहीं किया था। वे गांधीवादी रहे। मप्र के इकलौते नेता थे, जो सफेद गांधी जी वाली टोपी पहनते थे। पार्टी की वरिष्ठ नेता उनका कहा हुआ नहीं टालते थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जुड़े रहते थे। अंतिम समय तक उनकी सक्रियता बनी रही। इकबाल मैदान पर उनके समर्थकों द्वारा आयोजित किया जाने वाला मुशायरा राजधानी भोपाल में विशेष पहचान रखता है।