
जीएडी ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर उनकी ऑफिस की जरूरतों और स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। जीएडी को 58 विभागों के 84 कार्यालयों से पत्र प्राप्त हुआ है। 33 विभाग के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरण के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल एक लाख तीन हजार वर्ग मीटर जगह मांगी है। बाकी छह कार्यालय रेनोवेशन व प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं है। 19 अन्य के अपने स्वतंत्र और पर्याप्त ऑफिस हैं।
सूत्रों के मुताबिक जिन भी ऑफिस में रेनोवेशन या निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां काम रोका जा सकता है। किसी को भी नई जमीन आवंटित नहीं होगी। सभी को सेंट्रल विस्टा में ही जगह दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सभी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कॉर्पोरेट की तरह यह हाईटेक आफिस होगा।
पुराने हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया सेंट्रल विस्टा बनेगा। पुराने दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर है। नये सेंट्रल विस्टा में लगभग दोगुना यानी 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्रफल होगा। नई योजना में 12 नये टावर बनाने की योजना है।
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हरित क्षेत्र को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर (लगभग चार गुना) किया जा रहा है। साथ ही अगले 50 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए विशाल पार्किंग बनाई जाएगी। आम जनता की सुविधा के लिए मेट्रो स्टेशन से कवर्ड पाथ-वे, हाकर्स कार्नर और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी इस मास्टर प्लान का हिस्सा है।
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता 12 टावरों को जोड़ने वाली एक साझा छत (परगोला) होगी। इससे न केवल परिसर का तापमान कम रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सोलर ऊर्जा भी पैदा की जाएगी। हालांकि, साधिकार समिति ने इस पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का विवरण मांगा है।