भारत में पुतिन के रेड कार्पेट वेलकम पर जेलेंस्‍की की चुप्‍पी, अब भारत आने की तैयारी में यूक्रेनी राष्‍ट्रपति, नई दिल्ली में शांति का नया फॉर्मूला!

Updated on 08-12-2025 01:34 PM
कीव/नई दिल्ली: दो दिनों के लिए भारत आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दिल्ली में भव्य स्वागत किया गया। खुद प्रधानमंत्री मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे। लेकिन अब भारत, डिप्लोमेटिक बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत, आने वाले महीने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की के दिल्ली दौरे की तैयारी में जुट गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेलेंस्की का भारत दौरा जनवरी 2026 की शुरूआत में हो सकता है।

आपको बता दें कि इसे डिप्लोमेटिक बैलेंस के नजरिए से देखा जा रहा है और भारत पिछले साल भी ऐसा कर चुका है। जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉस्को गए थे और पुतिन से मिले थे और उसके एक महीने बाद, अगस्त में, उन्होंने यूक्रेन का दौरा किया था, जहां जेलेंस्की से उनकी मुलाकात हुई थी। सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने कहा है, कि भारत और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच कई हफ्तों से बातचीत चल रही है और पुतिन के भारत आने से पहले ही नई दिल्ली, जेलेंस्की के ऑफिस के संपर्क में थी। माना जा रहा है कि यही वजह है कि जेलेंस्की की तरफ से पुतिन के दिल्ली दौरे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
क्या जनवरी 2026 में होगा जेलेंस्की का दिल्ली दौरा?
कोशिश और उम्मीद इसी बात को लेकर है। लेकिन यूक्रेनी राष्ट्रपति का दौरा कई बातों पर निर्भर करता है। जिनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शांति प्लान कैसे आगे बढ़ता है और युद्ध के मैदान में क्या होता है, यह भी शामिल है। यूक्रेन की घरेलू राजनीति, जहां जेलेंस्की की सरकार अभी एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में फंसी हुई है और दबाव में है, उसके नतीजे भी यात्रा पर असर डाल सकती है। आपको बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रपतियों का इससे पहले सिर्फ 3 बार ही भारत दौरा हुआ है। साल 1992 में, साल 2002 में और साल 2012 में।
पुतिन के दिल्ली दौरे पर यूरोप की कड़ी नजर रही है। यूरोप के कई देशों ने भारत से अपील की थी कि वह मॉस्को को युद्ध खत्म करने के लिए अपने असर का इस्तेमाल करे। हालांकि, दिल्ली ने लगातार कहा है कि बातचीत और डिप्लोमेसी ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा भी था कि "भारत न्यूट्रल नहीं है, भारत शांति के साथ है।" रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था और उसके बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जेलेंस्की के बीच चार बार मुलाकात हुई है। पीएम मोदी खुद यूक्रेन का भी दौरा कर चुके हैं। मोदी ने जेलेंस्की से कम से कम आठ बार फोन पर भी बात की है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली, लगातार कीव और मॉस्को के संपर्क में है और शांति के लिए दोनों ही देशोों से बात कर रहा है।
जेलेंस्की का दिल्ली में पुतिन जैसा स्वागत?
ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया हुआ है। जबकि भारत ना ही रूस को छोड़ सकता है और ना ही यूरोप को दरकिनार कर सकता है। ऐसे में , जो युद्ध में किसी की तरफ नहीं, बल्कि शांति की तरफ खड़ा है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति, युद्ध की घटनाएं और यूक्रेन की आंतरिक स्थिति तय करेगी कि यह यात्रा कब और कैसे संभव हो पाती है। लेकिन इतना निश्चित है कि नई दिल्ली, एक बार फिर वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक 'टाइटरोप वॉक' की तैयारी कर रही है।
आपको बता दें कि पिछले साल अगस्त में नरेन्द्र मोदी यूक्रेन जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच चार कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर साइन किए और मोदी ने जेलेंस्की से कहा था, कि वह शांति लाने में भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। भारत ने इस दौरान कहा था कि वह यूक्रेन की संप्रभूता और अखंडता का सम्मान करता है।
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