दुबई: पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के संबंध मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान ने यूएई के कहने पर उसका पूरा कर्ज चुका दिया है। पाकिस्तान पर यूएई का कुल 3.45 अरब डॉलर का कर्ज था। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने सोशल मीडिया पोस्ट में भुगतान की पुष्टि की और कहा कि लेनदेन गुरुवार (23 अप्रैल, 2026) को पूरा हुआ। पाकिस्तान ने यह कर्ज सऊदी अरब से नया कर्ज लेकर चुकाया है, लेकिन इसके समय को लेकर सवाल उठे।पाकिस्तान से क्यों नाराज है यूएई?
पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके कामों से तटस्थता के अलावा कुछ और ही झलक रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, सऊदी अरब पर उसकी बढ़ती निर्भरता और खाड़ी में ईरान के कदमों पर उसकी चुप्पी ने इस धारणा को मजबूत किया है कि पाकिस्तान दोनों तरफ खेलने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान का यह संतुलन बनाने का खेल यूएई को रास नहीं आया है।पाकिस्तान से सऊदी अरब की नजदीकी पड़ी भारी
फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए चैथम हाउस के नील क्विलियम ने कहा कि अमेरिका-ईरान विवाद में खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिश से यूएई नाराज हो गया है, जो इस स्थिति को कहीं ज्यादा साफ नजरिए से देखता है। भले ही पाकिस्तान तटस्थता का दावा कर रहा हो, लेकिन यूएई को पाकिस्तान की इन बातों पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है। क्विलियम ने यूएई के भारत के साथ बढ़ते रणनीतिक तालमेल की ओर भी इशारा किया, और कहा कि अबू धाबी अब पाकिस्तान की सऊदी अरब से नजदीकी को हितों का टकराव मानने लगा है।
पाकिस्तान ने यूएई को लेकर चुप्पी साधी
यूएई के शिक्षाविद अब्दुलखलेक अब्दुल्ला ने अबू धाबी के रुख के बारे में कहा कि पाकिस्तान के रवैये को लेकर साफ तौर पर "हताशा" दिख रही है। उन्होंने कहा, "हालांकि, नाराज होना एक बात है, लेकिन यह सब हो जाने के बाद रिश्ते पर फिर से विचार करना बिल्कुल अलग बात है।" इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को ज्यादा तवज्जो नहीं दी, और कर्ज चुकाने को एक "नियमित वित्तीय लेन-देन" बताया, साथ ही खाड़ी में तनाव से इसका कोई भी संबंध होने से इनकार किया।पाकिस्तान को लेकर यूएई का फैसला चौंकाने वाला क्यों?
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान और यूएई के बीच तनाव पैदा कर दिया है। यूएई की तरफ से कर्ज चुकाने की अचानक की गई मांग ने पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) दोनों को ही चौंका दिया। यह चौंकाने वाला इसलिए भी था, क्योंकि यूएई ने पहले यह भरोसा दिलाया था कि वह 2027 में पाकिस्तान का IMF कार्यक्रम खत्म होने से पहले कर्ज की वापसी की मांग नहीं करेगा। इस घटनाक्रम के चलते पाकिस्तान की सऊदी अरब पर निर्भरता और भी बढ़ गई है, जिसके पैसों पर इस्लामाबाद की सरकार चल रही है।