अहमदाबाद: नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक लाख से ज्यादा दर्शकों के बीच जब दुबे-दुबे के नारे गूंज रहे थे, उसके कुछ ही घंटों बाद टीम इंडिया का यह एक्शन हीरो एक अलग ही मिशन पर था। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी ओवर में 3 चौके और 2 छक्के जड़कर भारत का स्कोर 250 के पार पहुंचाने वाले शिवम दुबे को मुंबई जाने के लिए फ्लाइट नहीं मिली, तो उन्होंने जो रास्ता चुना, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था।एसी 3 टियर में अंडरकवर वर्ल्ड चैंपियन
सोमवार की सुबह, जब पूरा देश जीत के जश्न में डूबा था, शिवम दुबे अपनी पत्नी अंजुम और एक दोस्त के साथ अहमदाबाद-मुंबई सयाजी एक्सप्रेस के एसी 3-टियर कोच में सफर कर रहे थे। मुंबई की सभी फ्लाइट्स फुल होने के कारण दुबे ने ट्रेन से जाने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें अपने 4 साल के बेटे अयान और 2 साल की बेटी महविश से मिलने की जल्दी थी। अपनी पहचान छिपाने के लिए दुबे ने टोपी, मास्क और फुल स्लीव टी-शर्ट पहनी थी और ट्रेन के रवाना होने से महज 5 मिनट पहले कोच में दाखिल हुए।जब टीटीई ने पूछा- 'क्या यह वही क्रिकेटर है?'
ट्रेन के भीतर अपनी ऊपर वाली बर्थ पर भूरे रंग के रेलवे कंबल में छिपे दुबे के लिए सबसे मुश्किल पल तब आया, जब टिकट चेकर वहां पहुंचा। नाम देखते ही टीटीई ने पूछा, 'शिवम दुबे? वह कौन है, क्रिकेटर?' इस पर उनकी पत्नी अंजुम ने बड़ी चतुराई से जवाब दिया, 'नहीं-नहीं, वह यहां कहां से आएगा?' टीटीई आगे बढ़ गया और इस तरह एक वर्ल्ड चैंपियन पहचान लिए जाने के खतरे से बच गया। दुबे ने बताया कि वे पूरे 8 घंटे की यात्रा के दौरान ऊपर वाली बर्थ पर ही दुबके रहे ताकि भीड़ उन्हें घेर न ले।
बोरीवली स्टेशन पर पुलिस सुरक्षा में एग्जिट
दिन के उजाले में मुंबई के बोरीवली स्टेशन पर उतरना दुबे के लिए बड़ी चुनौती थी। उन्हें डर था कि वहां फैंस उन्हें पहचान लेंगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे में उन्होंने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस को भी तब हैरानी हुई जब उन्हें पता चला कि वर्ल्ड कप का हीरो फ्लाइट से नहीं, बल्कि ट्रेन से आ रहा है। पुलिस सुरक्षा के बीच दुबे सुरक्षित रूप से स्टेशन से बाहर निकले और अपने घर पहुंचे।मैदान पर गंभीर और सूर्या के फिनिशर
टूर्नामेंट में शिवम दुबे ने कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव द्वारा दी गई भूमिका को बखूबी निभाया। उन्होंने 39 की औसत और 169 के स्ट्राइक रेट से कुल 235 रन बनाए। फाइनल में उनकी 8 गेंदों पर 26 रनों की पारी निर्णायक साबित हुई। पूरे टूर्नामेंट के दौरान दुबे ने 17 छक्के और 15 चौके जड़े। दुबे ने कहा कि उन्हें साफ निर्देश थे कि जब भी वे बल्लेबाजी करें, रन रेट नीचे नहीं गिरना चाहिए और उन्होंने ठीक वैसा ही किया।