रूस ने भारत के पड़ोस में क्यों भेजा युद्धपोत, अंडमान सागर में इस देश की नौसेना के साथ कर रहा शक्ति प्रदर्शन

Updated on 14-11-2025 12:43 PM
ढाका: रूसी नौसेना का प्रशांत बेड़ा इन दिनों भारत के पड़ोसी देश म्यांमार के दौरे पर है। इस दौरे में शामिल युद्धपोतों में फ्रिगेट मार्शल शापोशनिकोव, कोर्वेट ग्रेम्यश्ची और टैंकर बोरिस बुटोमा शामिल हैं। ये तीनों युद्धपोत बांग्लादेशी नौसेना के साथ अंडमान सागर में युद्धाभ्यास कर रहे हैं। इस युद्धाभ्यास को MARUMEX 2025 नाम दिया गया है। यह युद्धाभ्यास तब हो रहा है, जब म्यांमार गृहयुद्ध से जूझ रहा है। इस युद्धाभ्यास के लिए अंडमान सागर का चयन भी चिंता का विषय है, क्योंकि यहां स्थित अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में भारत का इंटीग्रेटेड ट्राई सर्विस कमांड स्थित है, जिसमें सेना, नौसेना और वायुसेना के मुख्यालय शामिल हैं।

पनडुब्बियों की खोजबीन करेंगे युद्धपोत

News.Az की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े ने बताया है कि दोनों नौसेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास का उद्घाटन समारोह बुधवार को थिलावा बंदरगाह में आयोजित किया गया। बयान में कहा गया कि दोनों देशों के नौसेना दल संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान नौसैनिक नियंत्रण का अभ्यास करेंगे। इस दौरान युद्धाभ्यास में शामिल युद्धपोत पारंपरिक दुश्मन पनडुब्बियों की खोज और ट्रैकिंग करेंगे और तोपखाने और टॉरपीडो का उपयोग करके मिशन को अंजाम देंगे।
समुद्री डाकूओं के खिलाफ चलाएंगे अभियान
इसके अलावा, दोनों देशों के आतंकवाद-रोधी समूह निरीक्षण में भाग लेंगे और "समुद्री डाकुओं" के कब्जे से एक जहाज को मुक्त कराने की ड्रिल भी करेंगे। रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य नौसेनाओं के बीच सहयोग को व्यापक रूप से विकसित और मज़बूत करना तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई समुद्री क्षेत्रों में नागरिक जहाजों और समुद्री आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अभ्यास करना है।

म्यांमार के कौन से युद्धपोत हुए शामिल



रूसी बेड़े ने बताया कि म्यांमार की नौसेना ने संयुक्त अभ्यास के लिए यूएमएस (म्यांमार संघ का जहाज) मोआत्तामा, एक लैंडिंग प्लेटफ़ॉर्म डॉक, फ्रिगेट क्यानसिथा, कोरवेट तबिनश्वेहती और पनडुब्बी मिन्ये थेनखाथु को भेजा है। म्यांमार की नौसेना अपेक्षाकृत छोटी और कमजोर है, लेकिन यह अंडमान सागर के एक महत्वपूर्ण इलाके की रखवाली करती है। इस इलाके पर चीन की भी नजर है और वह लगातार इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
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