ट्रंप को नोबल मिलना चाहिए... पुतिन का भारत में शानदार स्वागत देख पूर्व पेंटागन अधिकारी हैरान, अमेरिका को बहुत बड़ा नुकसान

Updated on 06-12-2025 12:25 PM
वॉशिंगटन: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के पूर्व अधिकारी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर अनोखा विश्लेषण किया है। पेंटागन के पूर्व अधिकारी ने कहा कि नई दिल्ली में पुतिन का शानदार तरीके से स्वागत होने का क्रेडिट मॉस्को को नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप को जाता है। उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप वास्तव में नोबेल प्राइज के हकदार हैं। पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौरे को मॉस्को के लिहाज से बहुत पॉजिटिव बताया। उन्होंने भारत और रूस को करीब लाने का क्रेडिट ट्रंप को दिया।

ट्रंप नोबेल प्राइज के हकदार

रुबिन ने कहा कि नई दिल्ली में पुतिन को जो सम्मान दिया गया, वह दुनिया में शायद ही कहीं और मिल सकता है। और दावा किया क इस रिश्ते को बनाने में ट्रंप की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैं तो यह कहूंगा कि डोनाल्ड ट्रंप भारत और रूस को जिस तरह से साथ लाए, उसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए।'
उन्होंने आगे सवाल किया कि 'इस दौरे के दौरान साइन किए गए कितने समझौते असली सहयोग में बदलेंगे और कितने फैसले इस बात से प्रेरित थे कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के साथ जो बर्ताव किया है, उससे भारत नाखुश है।' उन्होंने कहा, इसे दो अलग-अलग तरीकों से देखा जा रहा है। अगर आप डोनाल्ड ट्रंप हैं तो इसे 'मैंने आपसे कहा था' के नजरिए से देखा जाएगा। यह उस बात की पुष्टि करता है जो ट्रंप दिखाना चाह रहे हैं कि रूस के लिए भारत का झुकाव है। ट्रंप यह मानने वाले नहीं हैं कि गलती उनकी है।
अगर आप उन 65% अमेरिकी लोगों में हैं, जो हाल के पोल के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप को नापसंद करते हैं, तो जो हम देख रहे हैं वह डोनाल्ड ट्रंप की बहुत बड़ी नाकाबिलियत का परिणाम है। हम में से बहुत से लोग अभी भी इस बात से हैरान हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-भारत के रिश्तों को कैसे पलट दिया है। बहुत से लोग सवाल करते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप को क्या प्रेरित करता है।

अमेरिका का बताया बड़ा नुकसान

उन्होंने आगे कहा, 'शायद यह पाकिस्तानियों की चापलूसी थी। ज्यादा संभावना है कि यह पाकिस्तानियों या तुर्की और कतर में उनके समर्थकों की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप को रिश्वत थी... यह एक बहुत बड़ी रिश्वत है जो आने वाले कई दशकों तक अमेरिका को रणनीतिक घाटे में डाल देगी।'

अमेरिका का दिखाया दोगलापन

ANI से बात करते हुए रुबिन ने यह भी कहा कि अमेरिकियों को यह समझ नहीं आ रहा है कि भारतीयों ने प्रधानमंत्री मोदी को भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। भारत सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। यह जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने वाला है। इसके लिए इसे ऊर्जा की जरूरत है। उन्होंने अमेरिका पर दोहरा रवैया रखने का आरोप लगाया और कहा, अमेकिरा दोगलापन कर रहा है क्योंकि हम रूस से खरीदते हैं। हम ऐसे सामान और मटीरियल खरीदने हैं जिनके लिए हमारे पास कोई दूसरा मार्केट नहीं है। जब हम भारत को लेक्चर देते हैं तो हम दोगलापन कर रहे होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर नहीं चाहते कि भारत रूसी तेल खरीदे तो हम भारत को सस्ती कीमत पर और जरूरत के हिसाब से तेल देने के लिए क्या करेंगे। अगर हमारे पास इसका जवाब नहीं है तो हमारा सबसे अच्छा तरीका बस चुप रहना है, क्योंकि भारत को पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना है।
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