काबुल में भारतीय डेलिगेशन के साथ बैठक में कहा उन्होंने हमेशा अफगानिस्तान की मदद की

Updated on 09-03-2024 01:10 PM

भारत के एक डेलिगेशन ने गुरुवार को काबुल में तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से मुलाकात की। तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने कहा- बैठक में दोनों देशों के रिश्तों और आर्थिक संबंधों पर बातचीत हुई। इस दौरान अफगानिस्तान ने भारत को मानवीय मदद पहुंचाते रहने के लिए धन्यवाद कहा।

तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने कहा- हम भारत के साथ राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर रिश्तों को मजबूत करना चाहते हैं। इस दौरान विदेश मंत्री ने भारत से अफगान व्यापारियों, छात्रों और मरीजों के लिए वीजा लेने की प्रक्रिया आसान करने की अपील की। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से बैठक को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।

भारत के विदेश मंत्रालय से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के लिए जॉइंट सेक्रेटरी जेपी सिंह ने डेलिगेशन का नेतृत्व किया। तालिबान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में जेपी सिंह ने कहा- भारत ने पिछले ढाई सालों में अफगानिस्तान को लगातार मानवीय सहायता दी है।

भारतीय डिप्लोमैट ने आतंकवाद से लड़ने की कोशिशों के लिए अफगानिस्तान की तारीफ की
इसके अलावा भारत ने सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने, नशीले पदार्थों का मुकाबले करने, ISIS जैसे आतंकी संगठन और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए अफगानिस्तान की सराहना की। जेपी सिंह ने कहा- भारत अफगानिस्तान के साथ राजनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाना चाहता है। साथ ही उन्होंने चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापार बढ़ाने पर भी जोर दिया।

तालिबान के विदेश मंत्री से मिलने के बाद जॉइंट सेक्रेटरी जेपी सिंह ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा की।

भारत ने कहा था- हमारे हित अफगानिस्तान से जुड़े
इससे पहले फरवरी में भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी NSA) विक्रम मिस्री किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में अफगानिस्तान को लेकर हुई बैठक को संबोधित किया था। मिस्री ने कहा था- भारत के हित अफगानिस्तान से जुड़े हुए हैं। अफगानिस्तान का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को पनाह और ट्रेनिंग देने के लिए नहीं होना चाहिए।

मिस्री ने बताया था कि भारत ने अब तक यहां 2.49 लाख करोड़ का निवेश किया है। भारत अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में चल रहे 500 प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। ये प्रोजेक्ट्स क्षेत्र में पानी, बिजली, हेल्थकेयर, एजुकेशन, खेती और निर्माण कार्यों से जुड़े हैं।

डिप्टी NSA ने कहा था- भारत ने अब तक करीब 50 हजार टन गेहूं, 250 टन मेडिकल एड और 28 टन भूकंप से जुड़ी राहत सामग्री भेजी है। UN की तत्काल अपील को देखते हुए भारत ने 40 हजार लीटर मैलाथियान (एक तरह का इंसेक्टिसाइड) की भी मदद की है।

भारत ने अभी तक तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी
बता दें कि भारत ने अब तक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है। ऐसे में अफगानिस्तान में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों समेत एक तकनीकी टीम करती है। पिछले साल भारत में अफगानिस्तान की पुरानी सरकार के नियुक्त किए राजदूत पर दोनों देशों में तनाव बढ़ाने की कोशिश करने के आरोप लगे थे। इसके बाद भारत में अफगानिस्तान की ऐंबैसी बंद हो गई थी।

तब इस बात के कयास लगाए गए थे कि भारत तालिबान के प्रति अपने रुख में नर्मी ला रहा है। वहीं, 26 जनवरी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय दूतावास ने गणतंत्र दिवस समारोह में अफगान के कार्यवाहक दूत बदरुद्दीन हक्कानी को आमंत्रित भी किया था।

कूटनीतिक मान्यता की मांग कर रहा तालिबान
तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को काबुल के साथ ही पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से वो लगातार दुनिया से उसे मान्यता देने की मांग करता रहा है। तालिबान के कार्यकारी रक्षा मंत्री मुल्लाह मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने अल-अरेबिया न्यूज चैनल को एक इंटरव्यू दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था- सरकार ने मान्यता हासिल करने के लिए सारी जरूरतों को पूरा किया है।

इसके बावजूद अमेरिका के दबाव में आकर दूसरे देश हमें मान्यता नहीं दे रहे हैं। हम उन देशों से मान्यता की अपील करते हैं जो अमेरिका के दबाव में नहीं हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया के ताकतवर इस्लामिक देश हमें सरकार के तौर पर पहचानें।


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