फिलीपींस की ब्रह्मोस तैनाती से हिला चीन! पाकिस्तान का देख चुका अंजाम, भारत ने कैसे बदला दक्षिण चीन सागर का गेम?

Updated on 08-11-2025 01:12 PM
मनीला/बीजिंग: मई महीने के संघर्ष के दौरान भारतीय ब्रह्मोस हमलों को रोकने में पाकिस्तान के चीनी मूल के एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम रहे थे। पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर ब्रह्मोस का सटीक हमला, चीन के उस भ्रम का भी टूट जाना था, जिसमें उसे 1 प्रतिशत उम्मीद थी कि उसके एयर डिफेंस, ब्रह्नोस को रोक सकते हैं। चीन क्या, दुनिया में अभी ऐसा कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सके और फिलिपींस, जिसने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदा है, उसके मरीन कॉर्प्स ने अपने 75वीं वर्षगांठ समारोह में ब्रह्मोस मिसाइल बैटरी का प्रदर्शन किया है। ये दक्षिण चीन सागर में चीन को तगड़ी चुनौती है।

फिलीपींस ने अपनी पहली ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल बैटरी सार्वजनिक करके न सिर्फ अपनी तटीय रक्षा की क्षमता बढ़ा ली है, बल्कि उसने क्षेत्रीय पावर-डायनामिक्स को भी बदलने का संकेत दिया है। मरीन कॉर्प्स द्वारा की तरफ से जारी वीडियो, और आधिकारिक जानकारी से पता चलता है कि यह बैटरी पश्चिमी लुजोन (ज़ाम्बालेस) में स्टेज की गई है। इस ब्रह्मोस मिसाइल का रेंज 290 किलोमीटर है, यानी फिलीपींस अब अपने अधिकतर पश्चिमी जलक्षेत्र से बाहर आने वाली सतही जहाजी धमकियों को सीधे तौर पर निशाना बना सकता है।
दक्षिण चीन सागर में चीन को तगड़ी चुनौती
चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपने कंट्रोल का दावा करता है। चीनी कोस्ट गार्ड और फिलीपींस कोस्ट गार्ड के बीच अकसर झड़प होकी रहती है। फिलीपींस ने इसीलिए ब्रह्मोस मिसाइल खरीदा है। ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें दुश्मनों के जहाजों को डूबोने और सप्लाई चेन को तहस नहस करने में सक्षम हैं। जाम्बालेस से स्कारबोरो शोअल और लुजोन स्ट्रेट पर तैनाती का मतलब ही यही है कि फिलीपींस अब उन समुद्री मार्गों को चीन की आक्रामकता से सुरक्षित कर सकता है
वहीं, एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से दक्षिण चीन सीगर के स्कारबोरो शोअल के आस-पास गतिविधियां और चीन द्वारा उस क्षेत्र में नेचर-रिजर्व के ऐलान ने मनीला-बीजिंग तनाव तेज कर दिए हैं। अगस्त और सितंबर महीने में दोनों देशों के बीच बार बार टकराव हुआ है, ऐसे में चीन को काउंटर करने के लिए फिलीपींस को अपने ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती के लिए मजबूर होना पड़ा है। ब्रह्मोस की तैनाती के साथ, फिलीपींस ने ना सिर्फ सामरिक डिटेरेंस स्थापित किया है बल्कि यह एक स्पष्ट राजनीतिक-संदेश भी है कि मनीला अपने समुद्री दावों और आर्थिक-अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
फिलीपींस और भारत में ब्रह्मोस को लेकर सौदा
आपको बता दें कि मनीला और नई दिल्ली के बीच साल 2022 में ब्रह्मोस मिसाइल के लिए 375 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ था। इस सौदे के तहत पिछले साल भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलें फिलीपींस को सौंपनी शुरू कर दी थी। फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की तीन बैटरियां खरीदी हैं। इसके अलावा कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि फिलीपींस भारत को और ज्यादा ब्रह्मोस के ऑर्डर देने वाला है। पाकिस्तान के खिलाफ वास्तविक युद्ध में ब्रह्मोस ने साबित कर दिया था कि चीनी एयर डिफेंस सिस्टम उसके सामने किसी काम के नहीं हैं, इसीलिए दक्षिण चीन सागर में जिन देशों का चीन के साथ विवाद है, वो ब्रह्मोस में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जैसे इंडोनेशिया और भारत के बीच भी ब्रह्मोस सौदा आखिरी चरण में पहुंच चुका है।

तटीय रक्षा रेजिमेंट और फिलीपींस की मीडिया के मुताबिक, प्रत्येक फिलीपीन मरीन कॉर्प्स ब्रह्मोस बैटरी दो मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर, एक रडार वाहन, एक मिसाइल रीलोडर और कमांड एंड कंट्रोल ट्रक से लैस हैं। प्रत्येक लॉन्चर में दो ब्रह्मोस मिसाइलें हैं, जबकि रीलोडिंग वाहक को अतिरिक्त चार मिसाइलों के साथ देखा गया था। फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रीय रक्षा सचिव डेल्फ़िन लोरेंजाना का दावा है कि ये मिसाइलें देश के पश्चिमी आर्थिक क्षेत्र, जिसे पश्चिमी फिलीपीन सागर भी कहा जाता है, उसमें "हमारी संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ प्रतिरोध प्रदान करेंगी"।
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