नई सरकार के सामने जीएसटी-महंगाई सहित होंगी ये कई चुनौतियां, इन नीतिगत मुद्दों का करना पड़ेगा सामना

Updated on 05-06-2024 02:03 PM
नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव संपन्न होने के साथ अब नई सरकार का गठन होने जा रहा है। नई सरकार के सामने कई प्रमुख नीतिगत मुद्दों होंगे। इन नीतिगत मुद्दों में जीएसटी में सुधार, महंगाई, सार्वजनिक वित्त, खाद्य कीमतें और निवेश को बढ़ावा देना आदि कई शामिल हैं। सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। नई सरकार को पहले भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक आर्थिक स्थिति के कारण सुधारों में तेज़ी लाने की जरूरत हो सकती है। लेकिन केंद्र में गठबंधन सरकार होने की वजह से यह आसान नहीं हो सकता है। निजीकरण और जीएसटी पर पुनर्विचार जैसे कुछ मुद्दों पर आम सहमति की जरूरत होती है। आईए आपको बताते हैं ऐसे कौन से मुद्दे हैं, जिसपर नई सरकार को ध्यान देने की जरूरत होगी।

जीएसटी में सुधार

पांच स्लैब वाले जीएसटी रेट स्ट्रक्चर का तुरंत रीव्यू नहीं किया जा सकता है। इसके लिए 12% और 18% स्लैब को मर्ज करने की जरूरत हो सकती है, जिससे हाई ब्रैकेट में आने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क में बढ़ोतरी की जरूरत होगी। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर राजनीतिक सहमति बनाना आसान नहीं हो सकता है।

टाला जा सकता है निजीकरण

निजीकरण को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। आरबीआई के 2.1 लाख करोड़ रुपये के मेगा लाभांश और मजबूत जीएसटी राजस्व से केंद्र की वित्तीय स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन केंद्र को सब्सिडी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए धीमी गति से काम करना पड़ सकता है। हालांकि लीकेज को रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल ऐसा है जो नहीं बदलेगा।

निवेश को बढ़ावा

साल 2021-22 में 85 बिलियन डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, लगातार दो वर्षों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का वार्षिक फ्लो गिर रहा है। यह 2023-24 में 71 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। सरकार से इलेक्ट्रिक वाहनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित कई क्षेत्रों में निवेश व्यवस्था को और ज्यादा आकर्षक बनाने की उम्मीद है।

महंगाई बढ़ रही

हालांकि कुल मिलाकर महंगाई में कमी आई है। लेकिन अभी भी खाद्य कीमतें अस्थिर और उच्च बनी हुई हैं। सरकार कीमतों को मौसम से बचाने और गर्मी और बाढ़ जैसे जलवायु-प्रेरित झटकों से बचाने के लिए कदम उठा सकती है। वहीं नवीनतम जीडीपी डेटा कृषि क्षेत्र में सापेक्षिक ठहराव को दर्शाता है। सिंचाई और उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने वाले सुधारों की उम्मीद है। चुनाव परिणाम किसानों की आय बढ़ाने की चुनौतीपूर्ण लेकिन आसन्न आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं।

निर्यात और पीएलआई

उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने स्मार्टफोन और अन्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में मदद की है, लेकिन इसे खिलौने और जूते जैसे अन्य क्षेत्रों में विस्तारित करने की मांग की गई है। निर्यात उत्पादन के लिए चीन से बाहर निकलने के इच्छुक कंपनियों और क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए पीएलआई को और बेहतर बनाने की उम्मीद है। वहीं चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले, कई नए आर्थिक कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही थी। क्रिप्टोकरेंसी, एआई, डेटा सुरक्षा के बेहतर विनियमन पर विचार किया जा रहा है।

तेजी को बनाए रखना

अधिकांश अर्थशास्त्रियों को उम्मीद नहीं है कि 2024-25 की जीडीपी वृद्धि 2023-24 में 8.2% की वृद्धि को दोहराएगी। लेकिन मौजूदा वैश्विक आर्थिक माहौल में 7% की वृद्धि दर सुनिश्चित करना भी आसान नहीं होगा। अपेक्षित कदमों में ऊर्जा संक्रमण के लिए एक रोड मैप और इंफ्रा निवेश को बढ़ावा देना शामिल है। आर्थिक मंत्रालयों ने 2030 और 2047 के लिए विशिष्ट लक्ष्यों के साथ कार्य योजनाएं बनाई हैं। अगर नई सरकार में आम सहमति बनती है, तो मंत्रालय-वार कार्य योजना का अनावरण किया जा सकता है।
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