US में स्टेट ऑफ द यूनियन एड्रेस कल:जेलेंस्की की पत्नी के बाद दिवंगत नवलनी की वाइफ ने भी न्योता ठुकराया

Updated on 07-03-2024 01:11 PM

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन गुरुवार रात (भारत में शुक्रवार सुबह) को साल का संवैधानिक तौर पर सबसे अहम भाषण देंगे। इसे ‘स्टेट ऑफ द यूनियन एड्रेस’ कहा जाता है। अमेरिकी कांग्रेस (संसद के दोनों सदन) के मेंबर्स के अलावा सरकार के सभी अहम विभागों के प्रमुख इसमें शामिल होंगे। कुछ नामचीन हस्तियों को भी इसमें शामिल होने के लिए न्योता भेजा जाता है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की की पत्नी ओलेना जेलेंस्का और रूस के दिवंगत नेता एलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवल्नाया को फर्स्ट लेडी जिल ने इनवाइट किया था। दोनों ने न्योता ठुकरा दिया।

बहरहाल, यहां जानिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति की यह स्पीच संवैधानिक तौर पर सबसे अहम क्यों मानी जाती है और इस इवेंट से जुड़ी खास बातें...

मायने और अहमियत

यह इवेंट अमेरिका में गुरुवार रात (भारत में शुक्रवार सुबह) होगा। परंपरा के मुताबिक- अमेरिकी राष्ट्रपति नए साल की शुरुआत में संसद के संयुक्त सत्र यानी जॉइंट सेशन को संबोधित करते हैं। इसका जिक्र अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 2 के भाग 3 के एक बिंदू (क्लॉज 1) में किया गया है।

इस दौरान वो मोटे तौर पर आने वाले साल के लिए सरकार का एजेंडा बताते हैं। इसके अलावा बीते साल में जो कुछ उनकी सरकार ने किया, उसका भी जिक्र करते हैं। अमेरिकी अखबार ‘द हिल’ के मुताबिक- ज्यादा फोकस आम लोगों के लिए नई स्कीम्स और फॉरेन पॉलिसी मैटर पर किया जाता है। इसके अलावा प्रेसिडेंट भविष्य की चुनौतियां भी गिनाते हैं। हालांकि, गाइडलाइन या फॉर्मेट तय नहीं होता।

प्रेसिडेंट यह बताता है कि उसने अमेरिका और दुनिया में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए और आगे क्या करेगा। ‘यूएस स्टेट एंड पॉलिसी’ के मुताबिक- बतौर फेडरल स्टेट (राज्यों को मिलाकर बनने वाला देश) अमेरिका में किसी उद्धाटन या अंतिम संस्कार के बाद यह सबसे बड़ा अवसर होता है। इस दौरान कांग्रेस, ज्यूडिशियरी, आर्मी और इंटेलिजेंस समेत हर विभाग के सबसे आला अफसर और मंत्री एक मंच पर मौजूद होते हैं।

कब होता है ये भाषण

मोटे तौर पर देखें तो इसका समय तय नहीं है। आमतौर पर साल के पहले या दूसरे महीने में होता है। इलेक्शन इयर में पद छोड़ने जा रहा प्रेसिडेंट और नया राष्ट्रपति अलग-अलग दिन और समय पर स्टेट ऑफ द यूनियन एड्रेस करते हैं। 1938 के बाद यह देखा गया है कि नया राष्ट्रपति सिर्फ रस्म पूरी करता है, क्योंकि उसे काम शुरू करना होता है।

खास बात ये है कि बाइडेन ने जनवरी 2021 में पद संभाला और मार्च 2022 में पहला स्टेट ऑफ द यूनियन एड्रेस किया। वो पहले ऐसे राष्ट्रपति बने, जिन्होंने नए साल के तीसरे महीने यानी मार्च में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। हालांकि, अब वो दूसरी बार ऐसा करने जा रहे हैं।

कौन शामिल होता है

कांग्रेस : यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट मेंबर्स। इसमें पूर्व सदस्य भी शामिल होते हैं।

ज्यूडिशियरी : फेडरल सुप्रीम कोर्ट, स्टेट सुप्रीम कोर्ट्स और दूसरे जज।

एडमिनिस्ट्रेशन : सरकार के सभी मंत्री (सेक्रेटरी) और उनके टॉप अफसर।

आर्मी : अमेरिकी सेना के सभी चीफ ऑफ स्टाफ और खुफिया एजेंसियों के हेड्स।

इनवाइटीज : यानी मेहमान। इनके नाम प्रेसिडेंट, फर्स्ट लेडी और दूसरे मंत्री सलाह-मश्विरे के बाद तय करते हैं।

ओलेना जेलेंस्का और यूलिया नवल्नाया ने न्योता क्यों ठुकराया

‘स्काय न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक- यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की की पत्नी ओलेना जेलेंस्का और रूस के दिवंगत नेता एलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवल्नाया को फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने इस इवेंट के लिए इनवाइट किया था। हालांकि, दोनों ने ही इनकार कर दिया।

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन के सूत्रों के हवाले से इस बारे में रिपोर्ट पब्लिश की है। इन दोनों को फर्स्ट लेडी जिल के दाएं और बाएं तरफ बैठना था। सिटिंग अरेंजमेंट के जरिए दुनिया को यह मैसेज देने की कोशिश थी कि दोनों ही महिलाएं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के जुल्म का शिकार हैं और अलग-अलग देशों से होने के बावजूद एक प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं।

रिपोर्ट कहती है- यूलिया नवल्नाया ने इनविटेशन इसलिए ठुकराया, क्योंकि यूक्रेन विरोधी देश है। अगर वो इस इवेंट में आतीं तो रूस के लोगों में यह मैसेज जाने का खतरा था कि यूलिया देश विरोधी हैं। वैसे भी यूलिया के दिवंगत पति एलेक्सी नवलनी हमेशा से क्रीमिया को रूस का हिस्सा बताते रहे। यूक्रेन सरकार ने हमेशा इस मुद्दे पर नवलनी को निशाने पर रखा।

दूसरीतरफ, यूक्रेन की फर्स्ट लेडी ओलेना जेलेंस्का ने न्योता इसलिए ठुकरा दिया, क्योंकि वो भी रूस के किसी नेता की पत्नी के साथ मंच साझा नहीं करना चाहती थीं। इससे यूक्रेन के लोगों में गलत मैसेज जाने का खतरा था।


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