उदाहरण के लिए एक बड़ी चीनी कंपनी ने ऐपल आईपैड बनाने के लिए भारत में एक प्लांट स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई थी। लेकिन वह वियतनाम चली गई और वहां सालाना 8-10 अरब डॉलर मूल्य के आईपैड का उत्पादन कर रही है। इसी तरह चीन के स्मार्टफोन ब्रांड्स भी भारत की प्रमुख मोबाइल पीएलआई योजना में भाग लेने से कतरा रहे हैं। एक सूत्र ने कहा कि यदि चीनी कंपनियों को मोबाइल पीएलआई में भाग लेने से नहीं रोका जाता, तो भारत 2020 से कम से कम 5-7 अरब डॉलर का अतिरिक्त एक्सपोर्ट रेवेन्यू कमा सकते थे। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम और इलेक्ट्रिकल उत्पादों का आयात बढ़कर 89.8 अरब डॉलर हो गया। इसमें 44% चीन से और 56% हांगकांग से आया।
