
तमिलनाडु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 मार्च को रोड शो करने पहुंचे थे। इस दौरान वहां आए स्कूली बच्चों को लेकर कोयंबटूर पुलिस ने स्कूल मैनेजमेंट पर केस दर्ज किया। यह शिकायत जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने की थी। गुरुवार को मद्रास हाईकोर्ट ने स्कूल की प्रधानाध्यापिका की याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जी जयचंद्रन ने पुलिस से पूछा कि मौजूदा केस में किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 कैसे लागू हो सकती है। कोर्ट ने पुलिस को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 8 अप्रैल तक का समय दिया है।
पीएम का रोड शो देखने का मामला कोर्ट तक क्यों पहुंचा
19 मार्च को कोयंबटूर के साई बाबा विद्यालयम स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ जिला बाल संरक्षण अधिकारी देवी पवित्रा ने शिकायत दर्ज कराई। इसका आधार मीडिया रिपोर्ट्स थीं। FIR रद्द करने के लिए स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने याचिका लगाई।
कोर्ट ने आरोप लगाने वालों से पूछा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75, जो बच्चों पर हमला करने, दुर्व्यवहार या जानबूझकर मानसिक-शारीरिक पीड़ा पहुंचाने से जुड़ी है। वर्तमान मामले में कैसे लागू होगी।
इस पर अभियोजन पक्ष ने जवाब दिया कि स्कूल ने 32 छात्रों को भीड़-भाड़ वाली जगह पर रोड शो दिखाने के लिए ले जाकर उन्हें बेवजह मानसिक-शारीरिक पीड़ा में डाल दिया। क्योंकि उनके माता-पिता को लेने के लिए स्कूल आने में देरी हुई थी।
स्कूल की सफाई- बदला लेने के लिए झूठी शिकायत हुई
साईं बाबा विद्यालयम मिडिल स्कूल के अधिकारियों ने कहा कि यह शिकायत झूठी है और केवल स्कूल प्रबंधन को परेशान करने और बदला लेने के मकसद से दर्ज की गई है। स्कूल ने कहा कि यह आरोप कि स्कूल बच्चों को जबरदस्ती चुनाव प्रचार के लिए ले गया था, निराधार है। केवल राजनीतिक प्रतिशोध के तहत शिकायत दर्ज कराकर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
जज ने पुलिस को चेतावनी दी- दबाव में मामले दर्ज न करें
जस्टिस जयचंद्रन ने हैरानी जताई कि क्या केवल जिला बाल संरक्षण अधिकारी के कहने पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। जिन्हें घटना के बारे में केवल मीडिया रिपोर्ट से पता चला था। जबकि किसी भी माता-पिता ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। न ही रोड शो में कोई दुर्घटना हुई।
इस दौरान जज ने पुलिस को मीडिया रिपोर्टों से प्रभावित होने को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को दबाव में स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज नहीं करने चाहिए।
बच्चे चुनाव प्रचार करने नहीं रोड शो देखने गए थे- जज
सुनवाई के दौरान केस दर्ज करने वालों ने कहा कि एक सहायक रिटर्निंग अधिकारी ने भी 18 मार्च को आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से घटना की सूचना दी थी। इस पर जस्टिस जयचंद्रन ने कहा कि इस मामले में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी चुनाव अभियान के लिए नहीं किया गया था। उन्होंने बस एक रोड शो देखा था।
जस्टिस जयचंद्रन बोले- मौजूदा मामले में लिया जाने वाला फैसला राजनीतिक कार्यक्रमों में बच्चों की माैजूदगी से जुड़े मुद्दों पर बड़े पैमाने पर असर डालेगा। इसलिए कानून अधिकारी अपना होमवर्क करके बहस के लिए तैयार होकर आएं।