भारत के लिए बांग्लादेश बन रहा दूसरा पाकिस्तान, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की गिरफ्त में पड़ोसी देश, हिंदुओं के नरसंहार का खतरा

Updated on 20-11-2025 12:43 PM
ढाका: बांग्लादेश में शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने और पार्टी को अगले साल फरवरी में होने वाले चुनावों से बाहर करके मोहम्मद यूनुस ने देश का राजनीतिक मैदान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) जमात-ए-इस्लामी के लिए खुला छोड़ दिया है। अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद नेतृत्व बांग्लादेश को पाकिस्तान के करीब लेकर आ गए हैं और कट्टरपंथी जेहादियों को खुली छूट मिल गई है। इस बीच बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को मौत की सजा सुना दी है, जिससे अपदस्थ प्रधानमंत्री का अपने देश लौटना फिलहाल नामुमकिन हो गया है। ऐसे में नया बांग्लादेश भारत के लिए खतरा बनता जा रहा है।

भारत के लिए खतरे की घंटी

बांग्लादेशी लेखकर दीप हलदर ने बिजनेस टुडे के साथ बातचीत में बांग्लादेश में हो रहे बदलावों को भारत के लिए खतरे की घंटी बताया है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की मुस्लिम कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपना असर बढ़ा लिया है और अब वह ढाका में असल सिस्टम बना रही है। हलदर ने कहा कि अगर बीएनपी सत्ता में आती है तो भारत को उम्मीद करनी चाहिए कि यह नई बीएनपी होगी। क्योंकि 2001 में जो बीएनपी सरकार आई थी वह जमात के समर्थन से थी और वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किल समय था।
जमात-ए-इस्लामी बांग्लदेश को लेकर हलदर ने कहा कि यह जमात के साथ गठबंधन पर नजर रखनी होगी। अभी कोई पार्टी ऐसा नहीं कह रही है। चुनाव को बाद कोई अरेंजमेंट होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीएनपी को कितनी सीटें मिलती हैं। लेकिन अब बांग्लादेश में जमात की काफी हद तक सिस्टम बन गई है। जमात ने बहुत चालाकी से एकेडेमिया, मीडिया, न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर कब्जा कर लिया है। ज्यादातर संस्थाओं में जमात के लोग भरे हुए हैं।सत्ता में चाहे कोई आए, जमात ही असल सिस्टम होगा।

भारत के लिए पूर्व में बन रहा दूसरा पाकिस्तान?

हलदर ने कहा कि आज एक ऐसा बांग्लादेश है जो 1971 के विचार से बहुत दूर जा चुका है और ऐसा करना जारी है। सिर्फ हसीना ही उस गिरावट को रोक सकती थी। जमात और बीएनपी नहीं रोक पाएंगे। यह गिरावट सिर्फ राजनीतिक नहीं है, बल्कि सिविल सोसाइटी में भी है। पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश की नजदीकियां सबके सामने हैं। भारत के खिलाफ खुलेआम नफरत दिख रही है। उन्होंने बताया कि यह नफरत शेख हसीना के दौर में ही घर बना चुकी थी।

हसीना के समय में बढ़ रही थी नफरत

हलदर ने बताया कि हसीना के समय बांग्लादेश की सरकार भारत की मजबूत रणनीतिक सहयोगी थी, लेकिन सिविल सोसाइटी का बड़ा हिस्सा भारत से दूर हो गया था। जमीन पर भारत के खिलाफ नफरत थी, जो अब राजनीतिक रूप ले रही है। नेता खुलेआम भारत के खिलाफ हैं। असल में आज के बांग्लादेश में भारत के खिलाफ नफरत राजनीतिक रूप से फायदेमंद है।

हिंदुओं के लिए बढ़ रहा खतरा

हलदर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अब बांग्लादेश पर उतना ही ध्यान देना चाहिए जितना वह पाकिस्तान पर दे रहा है। उन्होंने हिंदुओं के लिए भी खतरा बताया और कहा कि उनके नरसंहार की खुली मांग हो रही है। खतरा मुसलमानों पर भी है। अहमदियाओं पर, मजारों पर जाने वालों और सूफियों पर हमले हो रहे हैं। गावों के अंदर धर्मांतरण बढ़ेगा और मीडिया को उसकी रिपोर्टिंग न करने के लिए मजबूर किया जाएगा। उन्होंने मोहम्मद यूनुस के बयानों का हवाला दिया जिसमें वह किसी विरोधी खबर को फेक न्यूज बताते हैं।
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