अरब देशों ने ठुकराया चीनी JF-17 विमान, लीबिया ने ऐतिहासिक डील से खोले पाकिस्तान के लिए बंद दरवाजे?

Updated on 29-12-2025 12:39 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के डिफेंस सेक्टर के लिए ये साल अच्छा रहा है। खासकर लड़ाकू विमानों के मामले में। JF-17 लड़ाकू विमान, जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर डेवलप किया है, उसने इस साल दो बड़ी डील हासिल की है। पहला सौदा इस साल की शुरूआत में हुआ था, जब अजरबैजान ने 4.6 अरब डॉलर में 40 JF-17C फाइटर जेट खरीदने के लिए सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं अब समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 22 दिसंबर को लीबिया ने 4-4.6 अरब डॉलर में JF-17C के लिए सौदा किया है। इस डील के तहत खलीफा हफ्तार के कमांड वाली लीबियाई नेशनल आर्मी (LNA) ग्रुप ने 16 JF-17C खरीदने के लिए पाकिस्तान के साथ समझौता किया है। ये गुट पूर्वी लीबिया को कंट्रोल करता है।

हालांकि ये काफी विवादित डील है, क्योंकि लीबिया सालों से गृहयुद्ध में फंसा हुआ है और यूनाइटेड नेशंस ने लीबिया के गुटों को हथियार बेचने पर बैन लगा रखा है। हालांकि फिर भी लीबिया का JF-17 लड़ाकू विमान खरीदने का मतलब है कि पाकिस्तानी जेट की अब अरब देशों में एंट्री हो गई है। पाकिस्तान के अरब देशों के साथ इस्लाम की बुनियाद पर अच्छे संबंध रहे हैं और अरब देशों का महंगे हथियार सौदे करने का इतिहास रहा है, इसीलिए सवाल ये उठते रहे हैं कि आखिर अरब देशों में अभी तक किसी ने पाकिस्तान के साथ हथियार समझौता क्यों नहीं किया था?
लीबिया ने पाकिस्तान के साथ किया JF-17C लड़ाकू विमान के लिए सौदा
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लीबिया डील में 16 JF-17, 12 सुपर मुशाक ट्रेनर एयरक्राफ्ट और हवा, जमीन और समुद्र के लिए बने दूसरे सैन्य उपकरण शामिल हैं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक तौर पर नहीं दी गई है। पाकिस्तान अगले ढाई सालों में इनकी डिलीवरी करेगा। LNA ने पुष्टि की है कि उसने पाकिस्तान के साथ एक रक्षा सहयोग समझौता किया है, जिसमें हथियारों का ट्रांसफर और जॉइंट ट्रेनिंग शामिल है। LNA लीबिया के पूर्व और दक्षिण हिस्से को कंट्रोल करता है, जिसमें दूसरा सबसे बड़ा शहर बेंगाजी भी शामिल है। इसकी संसद, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, टोब्रुक में है। जबकि, UN ने जिस सरकार को मान्यता दे रखी है, उसकी राजधानी त्रिपोली में है। हफ्तार की LNA ने 2019-20 में त्रिपोली को घेर लिया था, लेकिन तुर्की की मदद से सरकारी सेनाओं ने उन्हें पीछे धकेल दिया, जिसने आर्म्ड ड्रोन तैनात किए थे। तब से यह देश में बंटा हुआ है।
अरब देशों ने क्यों नहीं खरीदा था पाकिस्तानी जेट?
फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक लीबिया के एक गुट का पाकिस्तान से सौदा करना उसकी मजबूरी है, क्योंकि कोई और देश उसे लड़ाकू विमान नहीं बेचते। 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की सरकार के पतन के बाद से देश गृहयुद्ध में फंसा हुआ है और उसकी वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है। LNA के पास पुराने और सीमित संसाधन हैं, जबकि त्रिपोली स्थित संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार को तुर्की के ड्रोन मिले हुए हैं। ऐसे में JF-17C जैसे लड़ाकू विमान, जिसमें AESA रडार और लंबी दूरी की PL-15 मिसाइल लगे हैं, वो LNA को हवा में निर्णायक बढ़त दे सकते हैं।वहीं, अरब दुनिया के ज्यादातर बड़े सैन्य खरीदार, पहले से ही पश्चिमी देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से लैस हैं। सऊदी अरब के पास यूरोफाइटर टाइफून है, वह राफेल और F-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों में भी दिलचस्पी रखता है। कतर ने एक दशक के भीतर तीन अलग-अलग 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट खरीदे हैं, जबकि यूएई ने 80 राफेल F4 का बड़ा सौदा किया है। ऐसे में JF-17 लड़ाकू विमान उनके सामने कहीं नहीं ठहरते हैं। पाकिस्तान को इसीलिए अभी तक अरब देशों के खरीददार नहीं मिले।
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