अमेरिका की पाकिस्तानी सेना से नजदीकी... एस जयशंकर के बेटे ध्रुव की दो-टूक, बताई भारत संग संबंधों की सबसे बड़ी चुनौती

Updated on 12-12-2025 12:46 PM
वॉशिंगटन: ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ध्रुव जयशंकर ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तानी आर्मी से नजदीकी को भारत-यूएस के संबंधों में अड़चन माना है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के बेटे ध्रुव का कहना है कि अमरीका की ओर से भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाना और पाकिस्तानी सेना के साथ फिर से संबंध मजबूत करना भारत-अमरीका सहयोग में बड़ी बाधा बन रहा है। ध्रुव ने अमरीकी सदन की विदेश मामलों की उप-समिति के सामने यह कहा है।

ध्रुव ने अपने भाषण में कहा कि ट्रंप प्रशासन के भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता ना कर पाने और पाकिस्तानी सेना के साथ नजदीकी की वजह से भारत-अमरीका सामरिक साझेदारी पर खतरा पैदा हो गया है। ध्रुव ने इस दौरान पाकिस्तान में आतंकी गुटों को पनाह मिलने और इनके भारत के खिलाफ इस्तेमाल की तरफ भी ध्यान दिलाया।

पाकिस्तान का इतिहास किसी से छुपा नहीं

ध्रुव जयशंकर ने कहा, 'पाकिस्तान का भारत के खिलाफ नॉन-स्टेट टेररिस्ट प्रॉक्सी का इस्तेमाल करने का एक लंबा और डॉक्युमेंटेड इतिहास है। भारत का अनुभव है कि थर्ड-पार्टी मीडिएशन ने अक्सर पाकिस्तान के एडवेंचर में योगदान दिया है। ऐसे में असीम मुनीर के नेतृत्व वाली आर्मी के साथ ट्रंप प्रशासन की करीबी भारत के लिए चुनौती है।'ध्रुव ने आगे कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच डी-हाइफनेशन की पॉलिसी अपनाई है। अमेरिका ने पाकिस्तान और भारत के साथ बातचीत की है लेकिन उनके विवादों में कम से कम शामिल रहा है। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड और पाकिस्तान पर मतभेदों को सफलतापूर्वक मैनेज किया जाता है तो भविष्य में सहयोग के लिए काफी जगह है।

स्मिथ ने भी मानी भारत की अहमियत

फाउंडेशन से जुड़े दक्षिण एशिया मामलों के एक और विशेषज्ञ जैफ स्मिथ ने भी भारत से अमेरिका के बेहतर रिश्ते पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि आज के समय में भारत के भौगोलिक-राजनीतिक महत्व की अनदेखी नहीं की जा सकती है। भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में से एक है।

जैक स्मिथ ने आगे कहा कि भारत ने हालिया वर्षों में रक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक खर्च किया है। इसने भारत की सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा दिया है। अमेरिका को ये समझना होगा कि चीन के तमाम पड़ोसी देशों में से अकेला भारत ही है, जिसने बीजिंग की आक्रामक विदेश नीति का कड़ा प्रतिरोध किया है।
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