
इनोवेटर और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 21 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है, पर लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने समेत अन्य मांगें ठंडी नहीं पड़ी हैं। वांगचुक के उठने के दूसरे दिन शुक्रवार को 70 महिलाएं लेह के उसी एनडीएस मेमोरियल पार्क में माइनस 8 डिग्री सेल्सियस की सर्दी में भूख हड़ताल पर बैठ गईं।
चार दिन से उनका साथ देने के लिए बैच में रोज 400-500 महिलाएं भी आ रहीं है। एक बैच जाने के बाद दूसरा बैच दिनभर के उपवास पर बैठता है। यह क्रम 6 अप्रैल तक चलेगा। इसके बाद युवा भी 10 दिन भूख-हड़ताल करेंगे।
महिलाओं के अनशन के बाद 7 अप्रैल को लेह के शीर्ष निकाय के बैनर तले एलएसी के पास चांगथांग की ओर बॉर्डर मार्च या पश्मीना मार्च किया जाएगा, ताकि यह पता लग सके कि भारतीय चरागाह की कितनी भूमि पर चीन ने कब्जा कर लिया है। इस मार्च में 10,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
अनशन में शामिल एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी नोरजिन एंग्मो ने शुक्रवार को भास्कर से कहा था- मैं अपने बच्चों और पोते-पोतियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए भूख हड़ताल पर बैठी हूं। हम विकास के नाम पर लद्दाख के नाजुक पर्यावरण को खराब होते नहीं देख सकते।
नोरजिन ने कहा- 20 साल पहले, नदियां इतनी साफ थीं कि हम सीधे पानी पीते थे, पर आज अत्यधिक प्रदूषित हैं। हमें उनकी रक्षा की जरूरत है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी महिलाएं भाजपा का 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र की प्रतियां लहरा रही है। उसमें भाजपा ने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था।
वांगचुक बोले- PM मोदी चुनावी वादे पूरे करें
भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा था- ये आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। कल से महिलाएं भूख हड़ताल करेंगी। अपनी मांगों को लेकर हमें जब तक आंदोलन करना पड़े, हम करेंगे।
इससे पहले मंगलवार सुबह वांगचुक ने एक वीडियो मैसेज जारी किया था। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने चुनावी वादे पूरे करने की अपील की थी। वांगचुक ने कहा था- PM मोदी भगवान राम के भक्त हैं। उन्हें राम की 'प्राण जाए पर वचन न जाए' शिक्षा का पालन करना चाहिए।
आर्टिकल 370 हटने के बाद शुरू हुआ आंदोलन
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना। लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बना था।
इसके बाद लेह और कारगिल के लोग खुद को राजनीतिक तौर पर बेदखल महसूस करने लगे। उन्होंने केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। बीते दो साल में लोगों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन कर पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांगते रहे हैं, जिससे उनकी जमीन, नौकरियां और अलग पहचान बनी रही, जो आर्टिकल 370 के तहत उन्हें मिलता था।
4 मार्च को केंद्र ने मांगें मानने से इनकार किया था
इस साल की शुरुआत में बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल के नेताओं ने लेह स्थित एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के बैनर तले हाथ मिलाया। इसके बाद लद्दाख में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल होने लगीं।
केंद्र ने मांगों पर विचार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत सफल नहीं हुई। 4 मार्च को लद्दाख के नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और बताया कि केंद्र ने मांगें मानने से इनकार दिया है। इसके दो दिन बाद वांगचुक ने लेह में अनशन शुरू किया था।