हिंद महासागर में पहुंचे चीन के 3 जासूसी जहाज, भारत को टालना पड़ा मिसाइल टेस्ट, बंगाल की खाड़ी में आखिर कर क्‍या रहा ड्रैगन?

Updated on 27-11-2025 01:33 PM
बीजिंग: चीन के जासूसी जहाज Shi Yan-6 की वजह से भारत को अपना प्रमुख मिसाइल टेस्ट टालना पड़ा है। चीन, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में भारत के पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक चीनी सर्वे जहाज 'शि यान-6' के बाद भारत को अपना मिसाइल टेस्ट टालना पड़ा है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले ये मिसाइल टेस्ट 25-27 नवंबर के लिए प्लान किया गया था, लेकिन अब 1-3 दिसंबर के लिए इसे टाल दिया गया है। उम्मीद लगाई जा रही है कि उस वक्त तक शि यान-6 इस क्षेत्र से बाहर निकल जाएगा और मॉरीशस की तरफ बढ़ जाएगा।

भारत के मिसाइल टेस्ट से ठीक पहले सर्विलांस जहाज भेजने का चीन का लंबा इतिहास रहा है। चीन कई बार ऐसा कर चुका है और ज्यादातर बार भारत को अपना मिसाइल टेस्ट टालना पड़ा है। नौसेना की भाषा में सर्वे जहाज कई काम कर सकते हैं, जिसमें मिसाइल के रास्ते को ट्रैक करना भी शामिल है। सूत्रों ने कहा है कि शि यान-6 एक जासूसी जहाज है, जिसमें पानी के अंदर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रडार और सेंसर जैसे एडवांस्ड गैजेट लगे हैं।
चीनी जासूसी जहाज, भारत ने टाली मिसाइल टेस्ट
चीनी सर्विलांस जहाजों का बार बार हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में आना भारत के लिए परेशान करने वाला रहा है। वर्तमान में शी यान-6 सहित तीन चीनी सर्विलांस जहाज भारत के नजदीकी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सक्रिय हैं। शी यान-6 को चीन एक वैज्ञानिक अभियान पर होने का दावा करता है, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह जहाज अत्याधुनिक रडार, सेंसर और समुद्री निगरानी प्रणालियों से लैस है, जो मिसाइल की उड़ान पथ समेत कई तरह की डेटा की जासूसी कर सकता है। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जासूसी जहाज भेजकर चीन न सिर्फ भारत के सामरिक कार्यक्रमों की जानकारी जुटाना चाहता है, बल्कि क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति और शक्ति प्रक्षेपण क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।चीन के बाकी दोनों सर्विलांस जहाज शेन हाई यी हाओ (Shen Hai Yi Hao) और लान हाई 201 (Lan Hai 201) भी इस वक्त भारत के नजदीकी अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में ही मौजूद हैं। शेन हाई यी हाओ, मालदीव के पास समुद्री पर्वतों और खनिजों के सर्वेक्षण में लगा हुआ है और इसके पास 7,000 मीटर से ज्यादा गहराई तक जाने वाले पनडुब्बी प्लेटफॉर्म हैं। यह जहाज समुद्र तल के संसाधनों के अध्ययन के साथ-साथ संभावित रूप से समुद्री केबल मार्गों और पनडुब्बी मार्गों की मैपिंग भी कर सकता है, जो सैन्य स्ट्रैटजी के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील होता है। वहीं लान हाई 201 लक्षद्वीप के पश्चिमी क्षेत्र में सक्रिय है और यह सोनार तकनीक के माध्यम से समुद्र के भीतर की संरचना और गतिविधियों से संबंधित विभिन्न प्रकार का डेटा जमा करता है।
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