पाकिस्तान सीनेट रक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष मुशाहिद हुसैन ने शुरू में ट्रंप के नोबेल नामांकन की सराहना की थी और तर्क दिया था कि अगर यह "ट्रंप के अहंकार को संतुष्ट करने से फायदा मिलता है ऐसा करना सही है, क्योंकि यूरोपीय लोगों ने भी ऐसा ही किया है।" लेकिन एक दिन बाद वे सरकार की निंदा करते हुए ट्रंप के नोबेल नॉमिनेशन को निरस्त या रद्द करने की मांग कर रहा हैं। उन्होंने ट्रंप को युद्धोन्मादी बताया है। यानि पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारे में भी बवंडर आ गया है। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, "यह फैसला राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ है।" पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स यह कह रहे है कि "पाकिस्तान की सरकार खुद नहीं जानती कि वह किस स्टैंड पर है। ये दिखाता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति आज भी विचारधारा से नहीं, मजबूरी और अवसरवाद से चलती है।"
