
मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लाने हेतु देश में एक नई लहर प्रारंभ हुई है जिसके तहत छत्तीसगढ़ में 39 हजार802 दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहन ,17 हजार 956 तीन पहिया वाहन एवं 1596 चार पहिया वाहन संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा इलेक्ट्रिक वाहनों से ना कोई जहरीला धुआं निकलता है और न ही पेट्रोल डीजल की आवश्यकता होती है । पेट्रोल डीजल वाहन के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहन एक सस्ता एवम टिकाऊ विकल्प है ।
इस अवसर पर खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल,विधायक पुरंदर मिश्रा, ऊर्जा विभाग के सचिव पी दयानंद, क्रेडा विभाग के सीईओ राजेश राणा , जनसंपर्क आयुक्त मयंक श्रीवास्तव, क्रेडा विभाग के अधिकारी कर्मचारी , नागरिक एवं स्कूल कॉलेज की विद्यार्थी भी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रेडा द्वारा राज्य में सौर संयंत्रों के माध्यम से समाज के हर वर्ग एवं हर तबके के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं । किसानों हेतु सौर कृषि पंप, सुदूर ग्रामीण घरों में बिजली व पानी स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की आपूर्ति लोगों के लिए वरदान से कम नहीं है।
भारत सरकार का गो इलेक्ट्रिक कंपेन इस दिशा में एक उपयोगी एवं दूरगामी कदम है
उन्होंने कहा की आज हम सब को इस मुहिम का हिस्सा बनकर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए और ऊर्जा बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त करने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा के नियमों का हमेशा अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने कहा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित सम्मेलन में 'राष्ट्रीय वक्तव्य' देते हुए क्लाइमेट चेंज की समस्या से निपटने के लिए पांच सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया था, जिसे उन्होंने पांच 'अमृत तत्व' (पंचामृत) कहा था। वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार भारत की तरफ से जलवायु परिवर्तन निपटने के लिए प्रतिबद्धताओं की घोषणा की थी। इनमें से सबसे प्रमुख घोषणा है भारत 2070 तक कार्बन उत्सर्जन के नेट जीरो के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा था कि देश की आधी ऊर्जा आवश्यकताओं को 2030 तक नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करके पूरा किया जाएगा। इसके अलावा 2022 से 2030 तक की अवधि में कार्बन उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी करेंगे। चौथे प्वाइंट के रूप में भारत ने 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 45% से कम करने का लक्ष्य रखा है। पंचामृत योजना आर्थिक विकास के लिए अधिक लचीला, टिकाऊ, समावेशी स्वरूप प्रदान करेगा. गरीब लोगों को, महिलाओं को नए अवसर प्रदान करता है। यह निश्चित रूप से जलवायु परिवर्तन के लिए किए जा रहे प्रयासों में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।