नई दिल्ली: ब्रिटेन के सबसे अमीर हिंदुजा परिवार के चार सदस्यों पर घरेलू स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन्होंने स्विट्जरलैंड में अपने विला पर घरेलू स्टाफ से बेहद कम सैलरी पर 15 से 18 घंटे तक काम कराया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आरोपों में शोषण और मानव तस्करी शामिल है। इसी के साथ ही दावा किया गया है कि भारत से आए नौकरों को कम वेतन दिया जाता था, उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता था और उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे। इस मामले में स्विटजरलैंड में सोमवार से इन पर मानव तस्करी का ट्रायल शुरू हो गया है। सरकार के वकील ने दोषियों को कम से कम एक साल की सजा दिए जाने की मांग की है। बता दें कि हिंदुजा फैमिली ब्रिटेन से अपना कारोबार चलाती है। ये फैमिली दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल है। हिंदुजा ब्रिटेन में सबसे धनी फैमिली बताई जाती है।
लगे हैं कई गंभीर आरोप
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य सरकारी वकील ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि हिंदुजा अपने स्टाफ से ज्यादा अपने कुत्तों पर खर्च कर देते थे। इस मुकदमे ने परिवार द्वारा अपने कुत्ते पर कथित खर्च और अपने नौकरों की दैनिक मजदूरी के बीच भारी अंतर को उजागर किया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि हिंदुजा दंपत्ति ने अपने एक कर्मचारी को 18 घंटे के कार्यदिवस के लिए केवल सात स्विस फ़्रैंक (लगभग £6.19) का भुगतान किया, जबकि अपने पालतू कुत्ते पर सालाना 8,584 फ़्रैंक (£7,616) खर्च किए हैं। आरोप हैं कि विला में कर्मचारियों के लिए न तो काम के घंटे तय हैं और न ही उनकी साप्ताहिक छुट्टी का कोई समय है। स्टॉफ को नौकरी छोड़ने की इजाजत भी नहीं है। वहीं बिना परमीशन उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया जाता है।
आरोपों को किया खारिज
अभियोक्ता यवेस बर्टोसा ने अदालत में इस असमानता को उजागर किया, जबकि हिंदुजा के वकीलों ने तर्क दिया कि वेतन को कर्मचारियों को आवास और भोजन मिलने के संदर्भ में माना जाना चाहिए। उन्होंने लंबे समय तक काम करने के दावे को भी खारिज कर दिया। यह सुझाव देते हुए कि बच्चों के साथ फिल्म देखने जैसी गतिविधियों को काम के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए।
परिवार के समर्थन में गवाही
कुछ पूर्व नौकरों ने हिंदुजा परिवार के समर्थन में गवाही दी है और उन्हें दोस्ताना और सम्मानजनक नियोक्ता बताया है। हालांकि, पासपोर्ट जब्त करने और आवागमन की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के आरोप गंभीर हैं और इन्हें मानव तस्करी माना जा सकता है।