उस्मान ख्वाजा टेस्ट मैच में फिलिस्तीन को सपोर्ट करने के लिए जूते पहनकर खेलना चाहते थे। 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में वह जूते पर 'सभी जीवन समान हैं' लिखकर उतरना चाह रहे थे। आईसीसी ने इसकी अनुमति नहीं दी।

उस्मान ख्वाजा ने संन्यास की घोषणा के साथ ही एक और विवाद में फंस गए। ख्वाजा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं हमेशा से थोड़ा अलग महसूस करता आया हूं, आज भी कर रहा हूं। मैंने कई मायनों में खुद को बहुत अलग महसूस किया है, जिस तरह से मेरे साथ व्यवहार हुआ, जिस तरह से चीजें हुईं।'
उस्मान ख्वाजा करियर के अंत में एक के बाद एक विवाद में फंसते नजर आए। उन्होंने एशेज सीरीज के पहले टेस्ट के बाद पर्थ पिच की कड़ी आलोचना कर दी थी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को यह पसंद नहीं आया। बोर्ड ने उनसे अपने बयान पर स्पष्टीकरण मांगा था।
2025-26 एशेज सीरीज के शुरू होने से पहले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम जोरदार तैयारी कर रही थी। दोनों टीमों के लिए यह सीरीज ट्रॉफी से बढ़कर है। इसके बाद भी वह मैच शुरू होने से पहले तीन दिन लगातार गोल्फ खेलते नजर आए। पहले टेस्ट के दौरान उनके पीठ में दिक्कत हो गई और इसकी वजह से काफी बवाल हुआ।
आईसीसी से जूते पर मैसेज लिखने की अनुमति नहीं मिली तो उस्मान ख्वाजा इसका विरोध करने का फैसला किया। पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में वह हाथ पर काली पट्टी बांधकर खेलने उतरे। आईसीसी को यह पसंद नहीं आया और ख्वाजा को चेतावनी मिल गई। इसकी वजह से वह अगले टेस्ट में इसे पहनकर नहीं उतरे।
उस्मान ख्वाजा टेस्ट मैच में फिलिस्तीन को सपोर्ट करने के लिए जूते पहनकर खेलना चाहते थे। 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में वह जूते पर 'सभी जीवन समान हैं' लिखकर उतरना चाह रहे थे। आईसीसी ने इसकी अनुमति नहीं दी।