किस बात का है अफसोस
आज कंपनी छह बैटर और पराठा मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट ऑपरेट कर रही है। इनमें से एक यूनिट यूएई में है। कंपनी दिन में 2.5 लाख किलो बैटर और 52,000 किलो डो बना सकता है। इससे 44 लाख इडली और नौ लाख मालाबार पराठा बनाए जा सकते हैं। कंपनी ई-कॉमर्स और 45 शहरों में फैले 35,000 ऑफलाइन रिटेल पार्टनर्स के जरिए ग्राहकों तक पहुंचती है। 2023 में कंपनी का रेवेन्यू 500 करोड़ रुपये से अधिक रहा। कंपनी का दावा है कि उसके सारे प्रॉडक्ट्स 100 परसेंट नेचुरल हैं। उनमें किसी भी तरह के केमिकल और प्रिजरवेटिव का यूज नहीं हुआ है।लेकिन मुस्तफा को इस बात का अफसोस है कि वह अपनी सफलता को अपने बचपन के शिक्षक के साथ साझा नहीं कर सके। उन्होंने कहा, 'जब मैं घर लौटा, तो मुझे पता चला कि उनका निधन हो गया है। मैं चाहता था कि वो देखें कि एक मजदूर ने उनके कारण क्या हासिल किया है। 2018 में, मुस्तफा पीसी को प्रतिष्ठित हार्वर्ड में बोलने के लिए बुलाया गया था। मुस्तफा कहते हैं, 'मैंने पहले उन्हें उस शिक्षक के बारे में बताया, जिसने मुझे हार नहीं मानने दी। फिर अपने पिता के बारे में, जो अब भी अपने खेत में हर दिन पूरी मेहनत से काम करते हैं। इन लोगों ने मुझे सिखाया कि अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं, तो एक मजदूर का बेटा भी एक मिलियन डॉलर की कंपनी बना सकता है।
