पाकिस्तानी परमाणु छतरी के नीचे आया सऊदी अरब, कतर पर इजरायल हमले से खौफ, NATO जैसे समझौते की असल वजह जानें
Updated on
18-09-2025 01:34 PM
रियाद: सऊदी अरब ने बुधवार को परमाणु हथियारों से लैस इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान के साथ एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन NATO की तरह बताया जा रहा है। नाटो की तरह ही सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते में कहा गया है कि दोनों में से किसी भी देश के ऊपर हमला दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा। यह समझौता ऐसे समय में किया गया है, जब कतर की राजधानी दोहा में इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी देश डरे हुए हैं और अमेरिका की सुरक्षा गारंटी से उनका भरोसा उठ रहा है।
सऊदी को मिली पाकिस्तान की परमाणु छतरी
इस समझौते के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल के हमले से डरा सऊदी अरब ने पाकिस्तान की परमाणु छतरी (सुरक्षा) पाने के लिए इस पर हस्ताक्षर किए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जब यही सवाल पूछा तो एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने कहा, 'यह एक व्यापक रक्षा समझौता है, जिसमें सभी सैन्य साधन शामिल हैं।' पाकिस्तान ने कहा कि यह समझौता 'दोनों देशों की अपनी सुरक्षा बढ़ाने और क्षेत्र में सुरक्षा एवं शांति स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।'
फाइनेंशियन टाइम्स ने एक सऊदी अधिकारी के हवाले से बताया कि इस समझौते पर 2-3 साल से चर्चा चल रही थी। हालांकि, इस पर हस्ताक्षर तब गिए गए जब खाड़ी के सुन्नी देश पिछले सप्ताह कतर पर इजरायली हमले से हैरत में हैं। मिडिल ईस्ट आई ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि ट्रंप प्रशासन ने हमले को पहले से मंजूरी दी थी। यही वजह है कि अब खाड़ी के सुन्नी देश अमेरिका पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
अमेरिका से उठता खाड़ी देशों का भरोसा
कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, ये सभी अमेरिका के मजूबूत सैन्य साझेदार हैं और इनकी जमीन पर अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। कतर में अल-उदैद बेस तो क्षेत्र में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है। खाड़ी देश लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहे हैं और हाल ही में सीरिया, लेबनान और ईरान पर इजरायली हमलों को लेकर वॉशिंगटन के समर्थन से सतर्क रहे हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र के बहुत कम अधिकारियों ने यह कल्पना की थी कि इजरायल अमेरिका के समर्थन से कतर पर हमला करेगा। कतर एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी है और हमास और इजरायल के बीच मध्यस्थता करता रहा है। इन हालात में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सैन्य समझौता बहुत महत्वपूर्ण है। इस समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रियाद में हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी इस मौके पर मौजूद थे।
पाकिस्तान में भारत और इजरायल का खौफ
इस समझौते के पीछे पाकिस्तान का अपना डर भी है। इसी साल मई में पाकिस्तान का भारत के साथ घातक हवाई युद्ध हुआ था, जिसने दोनों प्रतिद्वंद्वियों को परमाणु संघर्ष के कगार पर ला दिया था। इस हमले में भारत ने पाकिस्तान के 11 सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया था। इसके अलावा पाकिस्तान क्षेत्र में बढ़ते हवाई प्रभुत्व से चिंतित है। बीते जून महीने में पाकिस्तान के पड़ोसी ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी और इजरायली हमलों ने पाकिस्तान की टेंशन बढ़ा दी है। इजरायल की भारत से नजदीकी भी पाकिस्तान के लिए बड़ी मुश्किल है।
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