
पड़ोसी जिले के मझोले कप्तान निपटा दिए गए, उनका नया ठिकाना अब पुलिस मुख्यालय भोपाल है। उनके तबादले से जवान खुश हैं। उन्हें लगता है कि शायद अब खाकी वर्दी स्पा के दाग धब्बों से बच सके। परंतु साहब के लिए बंगले में भी स्पा-मसाज की सुविधा उपलब्ध कराने वाली शराब तस्कर मैडम व फड़बाज रिस्सू के तो आंसू नहीं थम रहे। रिस्सू को मझोले ने ऐसा आशीर्वाद दिया था कि वह जबलपुर की सीमा से लगे जंगल में जुआरियों को बटोरने लगा। मझोले साहब ने दो पेटी का लेनदेन कर संबंधित थाने में एक थ्री स्टार की पोस्टिंग करा दी थी। थ्री स्टार की ससुराल व ननिहाल थाना क्षेत्र में ही है। भांजा रेत की तस्करी करता है। मझोले के तबादले से टीआइ साहब भी परेशान हैं। उन्हें डर है कि ऐसा न हो कि कुर्सी चली जाए, जुआ फड़ बंद हो जाए तथा भांजा भी रेत की तस्करी से हाथ धो बैठे।
सोने का अंडा देने वाली मुर्गी का पेट फाड़ने के चक्कर में टीआइ साहब को कुर्सी गंवानी पड़ी। पुलिस कप्तान के निर्देश पर देहात के थाने से हटाकर उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया है। हुआ यूं कि टीआइ रहते साहब ने एक मंडल अध्यक्ष के नाम से जंगल में जुआ फड़ चलाने की अनुमति दे दी। जिसके बदले फड़बाज हर दिन उन्हें 20 हजार रुपये देता था। साहब को सिर्फ चार माह नौकरी करनी है, जिसके बाद वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं। चार माह में इतनी कमाई कर लेना चाहते थे ताकि चार पीढ़ी का इंतजाम हो जाए। उन्होंने सोचा कि छुटपुट अपराध करवाकर छोटी-मोटी कमाई करने से अच्छा है कि मुर्गी का पेट फाड़कर सोने के सभी अंडे निकाल लिए जाएं। कप्तान जीरो टालरेंस पर जोर दे रहे हैं इसकी चिंता किए बगैर वे दनादन पारी खेलने लगे। कप्तान ने नजरें तरेरीं और सीधे लाइन पहुंचा दिया।
यदि आपको बिजनेस टिप्स चाहिए तो कहीं और जाने की जरूरत नहीं है। शहर के एक थाना प्रभारी थाने की कुर्सी तोड़ने के दौरान लोगों को बिजनेस टिप्स देते नजर आते हैं। पेट्रोल पंप खोलना हो, खनिज संपदा के कारोबार में उतरना हो, ट्रक, डंपर, जेसीबी, हाइवा खरीदना हो तो ऐसा ज्ञान देते हैं कि सुनने वालों को लगता है कि रातों रात करोड़पति बन जाएंगे। यदि रिसोर्ट खोलना है तो टीआइ साहब ड्राइंग डिजाइन तक समझाने लगते हैं। ये तो हुई व्यापार की बात, अब उनकी पुलिसिंग पर चर्चा कर लेते हैं। टीआइ साहब ठहरे मालगुजार, जो व्यापारिक पृष्ठभूमि वाले हैं, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्हें अपने मूल कार्य में कितनी रुचि होगी। परंतु ठीकठाक हैं। लोग कहते हैं कि अंग्रेजों के जमाने का थाना है, व्यावसायिक क्षेत्र है, इसलिए कप्तान साहब ने बहुत खोजबीन के बाद व्यापारी थाना प्रभारी भेजा है।
शीर्षक पर आधारित चर्चा राजस्व विभाग के एक कार्यालय में हो रही थी। जहां पुलिस जवान व राजस्व कर्मचारी चर्चा में लीन थे। चर्चा के केंद्र में आइएएस, आइपीएस, एसएएस व एसपीएस अधिकारी रहे। एक जवान ने कहा कि भैया आपके विभाग की दौ मैडमों ने तो कम्युनिकेशन सिस्टम की धज्जियां उड़ा दी हैं। दूसरे विभाग के अधिकारी संपर्क करने तरस जाते हैं। मोबाइल पर जवाब देने में इतना भाव खाती हैं कि कुछ बता नहीं सकते। नखरे ऐसे कि स्वयं बात न कर किसी अधीनस्थ अधिकारी को दूसरे विभाग के अधिकारी से बात करने का टास्क दे देती हैं। इन मैडमों के नखरों के बीच इनके विभाग से संबंधित बैठकों में लेटलतीफी भी दूसरे अधिकारियों का गुस्सा भड़का रही है। किसी बैठक में 2-3 घंटे का विलंब आम बात है। देखना यह है कि कलेक्टर व पुलिस कप्तान इस समस्या का समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।