नक्सली मुठभेड़ पर राजनीति हुई तेज, पीसीसी चीफ ने गृहमंत्री को लिखा पत्र...

Updated on 27-05-2024 06:43 PM

रायपुर। राज्य में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ को लेकर राजनीति तेज हो गई है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने गृह मंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखा है। पत्र में दीपक बैज ने लिखा कि अपने पीडिया मुठभेड़ मामले में कांग्रेस की जांच दल द्वारा उठाये गये तथ्यों पर आपत्ति व्यक्त की थी। पीडिया मुठभेड़ हो या कांकेर के कोयलीबेड़ा मुठभेड़ की बात हो कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से सवाल नहीं खड़ा किया, सवाल वहां के ग्रामीणों ने खड़ा किया है। कांग्रेस ने ग्रामीणों की मांग के बाद जाँच कमेटी बनाया और जाँच कमेटी में सभी आदिवासी नेता शामिल थे, जाँच कमेटी ने ग्रामीणों से बात करने के बाद जो तथ्य पाया वह दुखद है। ग्रामीण और साक्ष्य बता रहे कि मुठभेड़ में मारे गए कुछ लोग निर्दोष थे तो सरकार को इस मामले की जाँच कराने से क्या परहेज है? हाईकोर्ट के वर्तमान जज की देख-रेख में जाँच करा ली जाय ताकि स्थितियां साफ हो सके। कांकेर में हुई मुठभेड़ में मारे गए लोगो के भी नक्सली होने पर सवाल खड़ा हुआ था तब भी जाँच की मांग हुई थी, सरकार ने जाँच क्यों नहीं करवाया था ?

पीसीसी चीफ ने आगे लिखा : 'उप मुख्यमंत्री जी बस्तर में शांति के लिए जितने चिंतित आप है उतनी ही चिंतित कांग्रेस पार्टी भी है। कांग्रेस पार्टी बस्तर में शांति बहाली के सरकार के हर कदम के साथ खडी है लेकिन यह प्रयास बस्तर के मासूम आदिवासियों के जिंदगी के शर्त पर होंगे तो यह हमें मंजूर नहीं बस्तर में कांग्रेस की सरकार ने विश्वास, विकास, सुरक्षा के मूल मंत्र को लेकर शांति बहाली जो प्रयास शुरू किये थे जिसके फलस्वरूप बस्तर में शांति की स्थापना भी हुई, नक्सली गतिविधियां 80 प्रतिशत तक कम हुई। वर्तमान सरकार ने उस पर अविश्वास क्यों जताया? वर्तमान में सुरक्षा बलो को बड़ी सफलता मिल रही है तो उसका बड़ा कारण है पूर्ववर्ती सरकार ने दूरस्थ रिमोट क्षेत्रो जो कैम्प बनाये और इन कैम्पो के माध्यम से सुरक्षा बलो ने स्थानीय ग्रामीणों का भरोसा जीता है। कांग्रेस सरकार के पहले सुरक्षा बलो के कैम्पो में रसद सामग्री तक सरकार नहीं पहुंचा पाती थी। विश्वास, विकास, सुरक्षा का परिणाम था कि दूरस्थ क्षेत्रों में कैम्प के साथ अंदरूनी इलाकों में सड़क बनवाया गया, पुल-पुलिया बनाये गए, बंद पड़े 350 से अधिक स्कूलों को खोला गया, स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई गयी. मुख्यमंत्री हाट बजार क्लिनिक के माध्यम से लोगो का इलाज किया गया। जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को और मजबूत बनाने का प्रयास हुआ। वन अधिकार पट्टे सामुदायिक वन अधिकार पट्टे बांट कर उनमें एक नया भरोसा पैदा किया गया। 67 से अधिक वनोपजो की खरीदी कर आदिवासियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया गया। बस्तर का हर आदिवासी नक्सली नहीं है इस भावना के साथ कांग्रेस की सरकार ने काम किया था। सुरक्षा बलो और सरकार ने बस्तर के लोगो का भरोसा जीता जिसका परिणाम हुआ वहां नक्सली गतिविधियों में 80 प्रतिशत की कमी आई।'


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