कभी 18 रुपये की सैलरी में धोते थे जूठे बर्तन, आज 300 करोड़ की कंपनी के हैं मालिक

Updated on 11-03-2024 02:12 PM
जयराम बानन सागर रत्ना (Sagar Ratna) रेस्टोरेंट्स के मालिक हैं। पिता की पिटाई के डर से उन्होंने घर तक छोड़ दिया था। लेकिन हार मानने की बजाय उन्होंने अपनी मेहनत पर भरोसा किया और आज वह करोड़ों रूपये की फूड चैन खोल चुके हैं। वह हर साल करोड़ों रुपयों की कमाई करते हैं। आईए आपको बताते हैं कि जयराम बानन ने इतनी बड़ी सफलता कैसे हासिल की।

इस वजह से छोड़ा घर

मंगलौर (कर्नाटक) के पास स्थित 'उडुपी' के एक सामान्य परिवार में जन्मे जयराम बानन के पिता ड्राइवर थे। जयराम के पिता का गुस्सैल स्वभाव के थे। वह अपने पिता से बहुत डरते थे। जब जयराम बानन स्‍कूल एग्जाम में फेल हो गए तो उन्हें लगा कि उनके पिता उनकी बहुत पिटाई करेंगे। पिता की पिटाई के डर से केवल 13 साल की उम्र में ही वह घर छोड़ कर भाग गए। घर से भागने से पहले उन्होंने अपने पिता की पॉकेट से कुछ पैसे निकाले और मंगलौर से मुंबई जाने वाली बस में सवार हो गए। बानन 1967 में मुंबई आ गए।

ढाबे में धोए जूठे बर्तन

जयराम मुंबई आ गए लेकिन उनके पास कोई काम नहीं था। यहां उनका एक जानने वाला था, जो रेस्टोरेंट चलाता था। इसी रेस्टोरेंट में बानन काम करने लग गए। उम्र छोटी थी तो ज्यादा कुछ आता नहीं था। ऐसे में वे झूठे बर्तन धोते थे। इस काम के लिए उन्हें 18 रुपये महीने सैलरी मिलती थी। 6 साल तक उन्होंने बर्तन धोने का काम किया। जयराम की लगन देखकर उन्हें पहले वेटर और बाद में रेस्टोरेंट का मैनेजर बना दिया गया। इसके साथ ही उनकी सैलरी 200 रुपये महीने हो गई थी।

दोस्तों से उधार लेकर शुरू किया काम

जयराम साल 1974 में दिल्ली आ गए थे। उन्होंने खुद का बिजनस शुरू करने का सोचा। वे दिल्ली में अपना खुद का रेस्टोरेंट खोलना चाहते थे। यहां उन्होंने गाजियाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की कैंटीन चलाना शुरु किया। दोस्तों से उधार लेकर और कुछ अपनी सेविंग के साथ उन्होंने ये काम शुरू किया। पहली निवेश 2000 रुपये का किया। इसके बाद साल 1986 में उन्होंने साउथ दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी अपना पहला रेस्टोरेंट खोला, जिसका नाम सागर रखा था।इस रेस्टोरेंट से पहले ही दिन उन्होंने 408 रुपये कमाए थे।

बढ़ती गई रेस्टोरेंट्स की संख्या

जयराम की मेहनत रंग लाने लगी थी। जयराम के रेस्टोरेंट पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। लोगों को साउथ-इंडियन डिश खूब पसंद आ रही थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लोधी मार्किट में भी एक शॉप ओपन की और अपनी उसी क्वालिटी के फ़ूड को 20 फीसदी ज्यादा कीमत में देना शुरू किया। इसी तरह से उन्होंने अपने स्टार्टअप “सागर-रत्न” की शुरुआत की। आज दिल्‍ली में ही इसके 30 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं। वहीं उत्‍तर भारत में इसकी संख्या 60 से ज्यादा हो चुकी है।

विदेशों में भी आउटलेट्स

आज कनाडा, सिंगापुर, बैंकॉक जैसे देशों में भी इनके आउटलेट्स हैं। इन सब से उनका सालाना टर्न ओवर 300 करोड़ के ऊपर पहुंच चुका है। सागर रत्ना के अलावा उन्होंने 2001 में स्वागत नाम की एक और रेस्टोरेंट चेन शुरू की थी। लोग उन्हें 'नॉर्थ का डोसा किंग भी कहते हैं। आज दुनिया भर में उनके करीब 100 रेस्टोरेंट्स हो चुके हैं। आज जयराम हर साल करोड़ों रुपये कमाते हैं।

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