ओबामा बोले- अमेरिका लोकतंत्र से भटक रहा:ट्रम्प सरकार देश को खोखला कर रही, ट्रेड वॉर से खतरे में देश की गरिमा

Updated on 27-06-2025 12:52 PM

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले हफ्ते अमेरिकी राज्य कनेक्टिकट के हार्टफोर्ड शहर में एक कार्यक्रम में भाषण दिया। प्रसिद्ध इतिहासकार हीदर कॉक्स के साथ चर्चा में ओबामा ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई और युवाओं से देश को बचाने की अपील की।

ओबामा ने ट्रम्प सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जो लोग आज अमेरिका की सरकार चला रहे हैं, वे लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जरूरी है कि सरकार के बाहर और अंदर दोनों जगह से गलत चीजों का विरोध हो। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है।

ओबामा ने कहा कि व्यापारिक सौदों में डराया जा रहा है, जो केवल आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक रूप से भी खतरनाक है। उन्होंने अपने कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के बावजूद उन्होंने टैरिफ जैसे उपायों का बेजा इस्तेमाल नहीं किया था, क्योंकि यह अमेरिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने ट्रेड वॉर को गलत बताते हुए कहा कि इससे देश की गरिमा खतरे में है।

हंगरी जैसे देशों के रास्ते पर बढ़ रहा अमेरिका

ओबामा ने अमेरिका की तुलना हंगरी जैसे देशों से की, जहां चुनाव तो होते हैं, लेकिन वहां सच में लोगों की आवाज की कद्र नहीं होती और नेता मनमानी करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका भी अब ऐसे ही रास्ते पर बढ़ रहा है, जहां कानून और लोकतंत्र की असली भावना कमजोर हो रही है।

ओबामा ने चेतावनी दी कि अमेरिका में भी हालात उस दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं। ओबामा ने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव का उदाहरण दिया, जिसमें बाइडेन ने जीत हासिल की थी, लेकिन हारने वाले डोनाल्ड ट्रम्प ने धोखाधड़ी के झूठे आरोप लगाए।

ओबामा ने पुतिन और केजीबी का उदाहरण दिया

ओबामा ने इंटरव्यू में कहा कि सत्ता में बैठे लोग अक्सर उस माहौल का फायदा उठाते हैं, जहां लोगों को यह पता ही नहीं होता कि सच क्या है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन और उनके केजीबी (जासूसी एजेंसी) की एक कहावत है, जिसे अमेरिका में ट्रम्प के सलाहकार स्टीव बैनन ने भी अपनाया।

इस कहावत का मतलब है कि अगर आप चाहते हैं कि लोगों का दिमाग उलझ जाए, तो उन्हें सच्चाई समझाने की जरूरत नहीं है। उस माहौल में इतना ज्यादा झूठ और बकवास भर दो कि लोगों को लगे, अब किसी बात पर यकीन करना ही फिजूल है।

'जब लोग सच से हार मान लें, तभी तानाशाही पनपती है'

ओबामा ने आगे कहा- इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई नेता बार-बार झूठ बोल रहा है, या कोई राष्ट्रपति यह दावा कर रहा है कि उसने चुनाव नहीं हारा, बल्कि जीत हासिल की है, और चुनाव में गड़बड़ी हुई थी। लेकिन जब वही नेता चुनाव जीत जाता है, तो वह गड़बड़ी अचानक गायब हो जाती है।

झूठ पर कौन यकीन करता है, ये इतना मायने नहीं रखता, असली समस्या तब है जब लोग इन सबसे हार मानकर कहने लगते हैं, "अब तो कुछ फर्क ही नहीं पड़ता।" जब लोग सच से हार मान लेते हैं, तभी तानाशाही पनपती है।

ओबामा ने आगे कहा कि अमेरिका की एक बड़ी राजनीतिक पार्टी (रिपब्लिकन पार्टी) में आज यही हो रहा है। कई नेता जानते हैं कि जो बातें हो रही हैं वो सच नहीं हैं, लेकिन फिर भी वे ऐसा नाटक करते हैं जैसे सबकुछ ठीक और सच हो। यह बहुत खतरनाक स्थिति है।

ओबामा ने लोगों से कानून के पक्ष में खड़े होने की अपील की

ओबामा ने कहा कि अमेरिकी संविधान में लोकतांत्रिक नियम-कायदे भले ही शुरुआत में अधूरे थे, लेकिन समय के साथ इन्हें मजबूत किया गया। इससे नागरिकों को बुनियादी अधिकार मिले, जैसे कि बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी को सड़क से उठाकर किसी और देश नहीं ले जाया जा सकता। यह कोई राजनीतिक विचार नहीं था, बल्कि एक साझा अमेरिकी मूल्य था।

ओबामा ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से अब तक का यह दौर अमेरिकी लोकतंत्र के लिए सबसे कठिन समय है। अमेरिकी सरकार का नेतृत्व ऐसे हाथों में है जिन्हें कानून के शासन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी में आस्था नहीं है। यह सत्ता संविधान की शपथ लेकर भी उस पर आस्था नहीं दिखा रही।

ओबामा ने कहा कि आज जरूरत है कि सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि सरकार में मौजूद अधिकारी, चाहे वे किसी भी पार्टी से हों, कानून के पक्ष में खड़े हों और कहें, "नहीं, यह गलत है। कानून यही कहता है और हमें उसका पालन करना चाहिए।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकारी तंत्र में ऐसे लोग न हों, तो लोकतंत्र की दिशा बिगड़ सकती है।

"लोकतंत्र अपने आप नहीं चलता। इसके लिए लोगों की जरूरत होती है। जज, न्याय विभाग के अफसर, सरकार के अंदर ऐसे लोग जो संविधान की रक्षा की शपथ को गंभीरता से लें," ओबामा ने कहा। अगर ऐसा नहीं होता, तो देश धीरे-धीरे तानाशाही जैसी व्यवस्था की ओर बढ़ सकता है।

कार्यक्रम के अंत में जब उनसे पूछा गया कि वह युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं, तो ओबामा ने कहा कि वह अब भी आशावादी हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि गलत चीजों के खिलाफ गुस्सा जरूरी है, लेकिन बदलाव लाने के लिए जोड़ने वाली सोच जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपको उन लोगों से भी बातचीत करनी होगी जो आपसे हर बात पर सहमत नहीं हैं, लेकिन कुछ बातों पर हो सकते हैं।


Advt.

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 14 March 2026
इस्लामाबाद: अफगानिस्तान की तालिबान आर्मी ने कथित तौर पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ड्रोन अटैक किया है। अफगान सेना के शुक्रवार के ड्रोन हमले के बाद इस्लामाबाद हवाई अड्डा…
 14 March 2026
तेहरान: अमेरिकी सेना ने ईरान के महत्वपूर्ण खर्ग आईलैंड पर हमला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए इस हमले की जानकार दी है और…
 14 March 2026
तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर हमला बोला और कहा कि वॉशिंगटन पर भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने…
 14 March 2026
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आईलैंड पर हमला किया है। इस हमले के साथ ही यह सवाल उठने लगा है…
 14 March 2026
वॉशिंगटन: ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के मिसाइल हमले…
 14 March 2026
तेहरान/नई दिल्‍ली: भारत में तेल और गैस की भारी किल्‍लत के बीच ईरान ने बड़ी राहत दी है। ईरान ने कहा है कि वह स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय…
 14 March 2026
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि सेंट्रल कमांड ने ईरान के सबसे बड़े तेल टर्मिनल खर्ग आईलैंड पर भीषण हमला किया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल…
 14 March 2026
ढाका: बांग्‍लादेश में तारिक रहमान के पीएम बनने के बाद विदेश मंत्री खलीलुर रहमान शनिवार को अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्की जा रहे हैं। खलीलुर रहमान तुर्की के विदेश मंत्री…