मलयाली एक्ट्रेस रानी पद्मिनी, जिनका 3 नौकरों ने किया कत्ल:जो घर खरीदना था उसके बाथरूम में छिपाई लाश, अस्पताल में लावारिस पड़ा रहा शव

Updated on 24-02-2024 01:08 PM

15 अक्टूबर 1986, एक डबल मर्डर हुआ और पूरी साउथ इंडस्ट्री दहल गई। ये कोई आम मर्डर नहीं था। हत्या हुई थी महज 22 साल की मशहूर एक्ट्रेस रानी पद्मिनी और उनकी मां की। मर्डर इतनी बेरहमी से किया गया था कि हर कोई निर्दयता देखकर हैरान था।

रानी पद्मिनी मद्रास के अन्ना नगर (वेस्ट) की 18 एवेन्यू रोड के एक लग्जरी बंगले में मां के साथ रहती थीं, जो उन्होंने किराए पर ले रखा था। जब साउथ सिनेमा में उन्हें पहचान, शोहरत हासिल हुई तो उन्होंने उस किराए के बंगले को खरीदने का इरादा कर लिया, लेकिन फिर उसी घर में उनकी और मां की लाश मिली।

15 अक्टूबर 1986 को जब ब्रोकर प्रसाद, रानी पद्मिनी के घर पहुंचा, तो किसी ने दरवाजा नहीं खोला। प्रसाद लौटने को हुआ तो उसे घर से अजीब किस्म की गंध आने लगी। पलटकर वो पीछे के दरवाजे तक पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ था। घर के अंदर जाते ही कमरे का अस्त-व्यस्त हाल देखकर प्रसाद को अनहोनी का एहसास हुआ।

वो भागते हुए पुलिस स्टेशन गया और घर की तलाशी शुरू हो गई। पुलिस जब ग्राउंड फ्लोर के कमरे में पहुंची तो दुर्गंध तेज होने लगी। बाथरूम का दरवाजा खोला, तो मंजर देखकर पुलिस कर्मी भी दहल गए। खून से लथपथ दो लाशें एक के ऊपर एक पड़ी थीं। पहली लाश थी मशहूर साउथ एक्ट्रेस रानी पद्मिनी (22) की और दूसरी उनकी मां इंद्रकुमारी (44) की।

बाथरूम का फर्श खून से लाल हो चुका था। घटनास्थल इतना मर्मिक था कि लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने की बजाय टीम को घर ही बुलाया गया। बाथरूम में ही दोनों शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ और फिर शुरू हुई डबल मर्डर केस की पड़ताल।

मां खुद हीरोइन नहीं बनीं, तो बेटी से लगाई आस

रानी पद्मिनी का जन्म साल 1962 में मद्रास (अब चेन्नई) के अन्ना नगर में हुआ था, उनकी जन्म की तारीख फिल्म इतिहास में कहीं नहीं मिलती। रानी पद्मिनी, मां इंद्रकुमारी और पिता चौदरी की इकलौती संतान थीं। पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखने वालीं रानी पद्मिनी की मां इंद्रकुमारी एक समय में खुद सिनेमा से जुड़ना चाहती थीं, लेकिन समाज के बंधनों के चलते ऐसा नहीं हो सका।

उनकी कम उम्र में शादी करवा दी गई थी, जिसके बाद गृहस्थी में उलझकर उन्होंने अपने सपने का त्याग कर दिया। जब उनके घर बेटी ने जन्म लिया तो उन्होंने ठान लिया कि अपना अधूरा सपना बेटी के जरिए पूरा करेंगी।

पिता की मौत के बाद हीरोइन बनाने मुंबई ले गईं मां

मां बचपन से ही रानी पद्मिनी को हीरोइन बनने के ख्वाब दिखाने लगीं। रानी पद्मिनी काफी छोटी थीं, तभी उनके पिता गुजर गए। कुछ जमीन और गहनों की बदौलत ही वो मां के साथ गुजारा करने लगीं।

हिंदी सिनेमा में काम नहीं मिला तो मद्रास लौटीं

रानी पद्मिनी की मां चाहती थीं कि उनकी बेटी हिंदी सिनेमा में पहचान बनाए, जिसके लिए वो मद्रास में अपना सब कुछ बेचकर बॉम्बे (मुंबई) रहने चली गईं। वहां रहकर वो अपनी 16 साल की बेटी के साथ स्टूडियो के चक्कर काटा करती थीं। कई लोगों से मुलाकात करतीं और काम मांगती, लेकिन कई महीनों बाद भी न कोई काम मिला, न कोई फिल्म।

पहली फिल्म से रानी पद्मिनी ने छोड़ी गहरी छाप

निराश होकर इंद्रकुमारी बेटी रानी पद्मिनी को लेकर मद्रास लौट आईं। यहां उन्होंने अन्ना नगर के 18 एवेन्यू इलाके का एक लग्जरी बंगला किराए पर ले लिया। बेटी को हीरोइन बनाने के लिए इंद्रकुमारी ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

कई महीनों तक भटकने के बाद आखिरकार रानी पद्मिनी को 1980 की तमिल फिल्म मात्रवई नेरिल में एक छोटा सा काम मिल गया। इसके बाद कुछ कोऑर्डिनेटर्स की मदद से उन्हें कुछ और कन्नड़, तमिल और मलयाली फिल्मों में छोटा-मोटा काम मिलने लगा।

एक साथ रिलीज होने लगीं कई फिल्में

बचपन से हीरोइन बनने का ख्वाब लेकर बड़ी हुईं रानी पद्मिनी इतनी खूबसूरत और अभिनय की पक्की थीं कि छोटे-मोटे रोल में भी वो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया करती थीं। यही वजह रही कि उन्हें 1981 की मलयाली फिल्म कथायारीयाथे में सुकुमारन, श्रीविद्या जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ लीड रोल मिल गया।

ये मलयाली फिल्म तो कोई खास कमाल नहीं दिखा सकीं, लेकिन रानी पद्मिनी ने अपने अभिनय से साउथ सिनेमा में ऐसी पकड़ बना ली कि उन्हें लगातार एक साथ कई फिल्में मिलने लगीं।

19 साल की उम्र में स्टारडम हासिल कर साउथ सिनेमा का चेहरा बनीं

साल 1981 में महज 19 साल की रानी पद्मिनी को उस समय मलयाली स्टार समझे जाने वाले मोहनलाल के साथ फिल्म थेनम व्यंबम में लीड रोल निभाने का मौका मिला। इसी साल रिलीज हुई फिल्म संघर्षम से रानी पद्मिनी ने स्टारडम हासिल किया।

रानी पद्मिनी 1981 के बाद से ही साउथ सिनेमा का अहम हिस्सा बन चुकी थीं। उन्हें सालाना 10-12 फिल्मों में काम दिया जाने लगा था। जैसे-जैसे कामयाबी कदम चूमने लगी, वैसे-वैसे जरूरतें और लग्जरी जिंदगी की ख्वाहिश ने भी जेहन में दस्तक देनी शुरू कर दी। 80 के दशक में रानी पद्मिनी ने 7 लाख रुपए की निसान कार खरीदी थी, जो मद्रास शहर के इक्का-दुक्का लोगों के पास ही हुआ करती थी।

इश्तिहार दिया तो ड्राइवर बनकर घर पहुंचा चोर

अखबार में इश्तिहार निकला तो आए दिन लोग उनके घर के चक्कर काटने लगे। उन सभी में तीन लोगों का काम पसंद आने पर रानी पद्मिनी ने उन्हें घर में काम पर रख लिया। जपराज को रानी पद्मिनी ने निसान कार चलाने के लिए रखा, लक्ष्मीनरसिम्हा को वॉचमैन की नौकरी दी गई और कुक की जगह मिली गणेशन को।

नौकर रखने की हड़बड़ी में रानी पद्मिनी ने किसी का भी पिछला रिकॉर्ड जानने की कोशिश नहीं की, जो उनकी जिंदगी की दूसरी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। ड्राइवर की जगह पर आए जपराज का कार चुराने का पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड था। वो एक महीने पहले ही सेंट्रल जेल में एक साल की सजा काटकर आया था। वहीं वॉचमैन लक्ष्मीनरसिम्हा उसका ही एक पुराना साथी था।

जपराज के लिए रानी पद्मिनी के घर चोरी करना बेहद आसान था, क्योंकि वॉचमैन उसका दोस्त था और डबल स्टोरी लग्जरी बंगले में सिर्फ रानी पद्मिनी और उनकी मां ही रहती थीं। कोई आदमी नहीं था तो जपराज के लिए चोरी करना बेहद आसान था। वो रानी पद्मिनी की कार चलाते हुए चोरी की साजिश रचता रहा।

1984 की 12 फिल्मों में नजर आई थीं रानी पद्मिनी

रानी पद्मिनी ने समय के साथ मलयाली, तमिल फिल्मों के साथ-साथ तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा में भी जबरदस्त पहचान हासिल कर ली। 1983 में उनकी बैक-टु-बैक 9 फिल्में रिलीज हुईं और ज्यादातर हिट रहीं। 1984 में फिल्मों की संख्या बढ़कर 12 हो गई।

रानी पद्मिनी की फिल्मों की संख्या के साथ उनकी फीस भी बढ़ने लगी। फिल्म इतिहास में कहीं उनकी फीस की जानकारी तो नहीं है। हालांकि, अंदाजन उन्हें लाखों में फीस दी जाती थी।

साउथ सिनेमा की उभरती कलाकार रानी पद्मिनी को इसी बीच उनकी पहली हिंदी फिल्म प्रेम संदेश मिल गई। फिल्म में वो सचिन पिलगांवकर और आशा पारेख जैसे कलाकारों के साथ काम करने वाली थीं। फिल्म की शूटिंग मुंबई में शुरू हुई थी, जिसके लिए लिए रानी पद्मिनी और उनकी मां इंद्रकुमारी अपना घर नौकरों के भरोसे छोड़कर निकल गईं।

फिल्म प्रेम संदेश की शूटिंग पूरी करने के बाद जब रानी पद्मिनी घर लौटीं, तो उन्हें पता चला कि मकान मालिक उस घर को बेचने की ख्वाहिश रखता है, जहां वो किराएदार हैं। वो भी अपने घर की तलाश में थीं तो उन्होंने खुद वो घर खरीदने का मन बना लिया। इसके लिए उन्होंने ब्रोकर प्रसाद से संपर्क किया, जिसने उन्हें वो घर दिलाया था। प्रसाद ने उनके घर खरीदने के सारे बंदोबस्त कर दिए।

एक दिन रानी पद्मिनी की मां और ड्राइवर जपराज की जोरदार बहस हुई थी। बहस के दौरान इंद्रकुमारी ने उसे थप्पड़ मारा और काम से निकालने की धमकी दी। इसके बाद से ही जपराज इस बेइज्जती का बदला लेने की साजिश रचने लगा।

घर खरीदने के लिए बड़ी रकम घर में रखी, तो 3 नौकरों ने लालच में की हत्या

फाइनल डील करने के लिए एक दिन रानी पद्मिनी ने ब्रोकर प्रसाद को घर बुलाया। उस मीटिंग के दौरान उनका ड्राइवर जपराज भी मौजूद था। मीटिंग में रानी पद्मिनी ने कहा कि वो घर की डील के लिए 15 लाख रुपए नकद देंगी।

ये सुनते ही जपराज भांप गया कि घर में पूरे नकद रुपए और गहने मौजूद हैं। कार चुराने के लिए ड्राइवर बनकर रह रहे जपराज की नजर अब उस बड़ी रकम और गहनों पर थी। उसे बेइज्जती का बदला भी लेना था, तो उसने सीधे हत्या की प्लानिंग की। जपराज ने ही वॉचमैन और कुक को भी अपनी इस साजिश में शामिल कर लिया।

नशे में थीं रानी पद्मिनी, मां पर किए गए थे दर्जनों वार

रानी पद्मिनी अक्सर देर रात अपनी मां के साथ शराब पिया करती थीं। 15 अक्टूबर 1986 को भी वो अपनी मां के साथ शराब पीने बैठी थीं। दोनों नशे में थीं कि रानी पद्मिनी कुछ सामान लेने किचन की ओर चली गईं। पद्मिनी के कमरे से निकलते ही ड्राइवर जपराज, कुक गणेशन और वॉचमैन लक्ष्मीनरसिम्हा के साथ कमरे में दाखिल हो गया। इंद्रकुमारी कुछ समझ पातीं उससे पहले ही तीनों ने उन पर चाकू से हमला करना शुरू कर दिया।

चीख की आवाज सुनकर बाहर आई थीं रानी पद्मिनी, 12 वार कर की गई हत्या

रानी पद्मिनी किचन में थीं, जब उन्हें मां की चीखें सुनाई दीं। वो भागते हुए कमरे में गईं तो देखा, मां खून से लथपथ हैं और घर के तीनों नौकर उन पर लगातार चाकुओं से वार कर रहे हैं। रानी पद्मिनी को देखते ही तीनों ने उन्हें पकड़ लिया और वो कुछ समझ पातीं, उससे पहले ही उन पर 12 वार कर उनकी भी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद तीनों 5 लाख रुपए नकद और घर का हर कीमती सामान लेकर भाग निकले।

अगले दिन ड्राइवर जपराज एक महिला के साथ घर लौटा। उसने घर में 6 घंटे बिताए और फिर चला गया। साथ आई महिला से उसने कहा था कि रानी पद्मिनी, मां के साथ शहर से बाहर हैं। वो अकसर शूटिंग के सिलसिले में घर से बाहर रहती थीं, तो उनका नजर न आना किसी को नहीं खटका।

ब्रोकर को आई घर से सड़न की बदबू

4 दिन बाद तय की गई तारीख पर ब्रोकर प्रसाद दोपहर करीब 3 बचकर 30 मिनट पर अपने दोस्त के साथ रानी पद्मिनी से पैसे लेने घर पहुंच गया। कई बार डोरबेल बजाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। देरी होने पर प्रसाद लौटने लगा, लेकिन अचानक उसे घर से आती तेज दुर्गंध महसूस हुई।

उसने घर के पीछे की तरफ जाकर देखा तो दरवाजा खुला हुआ था। वो जैसे ही घर में दाखिल हुआ तो कमरे का हाल देखकर डर गया। पूरा सामान तितर-बितर बिखरा पड़ा था और आ रही दुर्गंध से वहां खड़े रह पाना मुश्किल था। उसे अनहोनी का एहसास हुआ तो वो सीधे पुलिस स्टेशन पहुंच गया और पुलिस को सूचना दी।

बाथरूम में मिली रानी पद्मिनी और मां की लाश, वहीं हुआ पोस्टमॉर्टम

जैसे ही पुलिस ने तलाशी शुरू की तो कमरे में बने खून के निशान बाथरूम की तरफ बढ़ रहे थे। पुलिस ने बाथरूम का दरवाजा खोला तो खून से सनी हुईं दो लाशें एक के ऊपर एक पड़ी सड़ रही थीं। प्रसाद यह देखकर दंग रह गया। लाशों की हालत इतनी बदतर थी कि उन्हें अस्पताल तक पहुंचाना मुमकिन नहीं था। ऐसे में पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम को घर में बुलाया गया और बाथरूम में ही पोस्टमॉर्टम किया गया।

एंबुलेंस की जगह कार की डिक्की में अस्पताल पहुंचाई गई थीं लाशें

एंबुलेंस की कमी की वजह से पुलिस की टीम दोनों लाशों को पन्नी में लपेटकर कार की डिक्की में रखकर अस्पताल पहुंची थीं। यह खबर सामने आते ही मीडिया चौकन्नी हो गई और पूरी इंडस्ट्री में हलचल मच गई। महज 22 साल की पद्मिनी की हत्या ने लोगों को अंदर से झकझोर कर रख दिया।

कई दिनों तक अस्पताल में लावारिस पड़ी रहीं लाशें

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद दोनों की लाशें अस्पताल में ही रखी गईं। अखबारों में खबर आ चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद 10 दिनों तक परिवार या इंडस्ट्री का कोई शख्स उनके शव लेने नहीं पहुंचा।

आखिरकार मलयाली चलचित्र परिषद के रिप्रेजेंटेटिव और एक्टर मोहन ने इंसानियत के तौर पर पुलिस से दोनों लाशों की जिम्मेदारी लेने की अपील की। पुलिस की रजामंदी के बाद मोहन ने ही फिल्म परिषद में दोनों लाशों का अंतिम संस्कार करवाया। अंतिम संस्कार में रानी पद्मिनी के मामा भी शामिल हुए थे, क्योंकि उन्हें दोनों की हत्या की खबर अखबारों के जरिए देर से मिली थी। वो एक रिटायर्ड IAS अफसर थे।

अब पुलिस को कातिलों तक पहुंचना था। जांच में पाया गया कि घर का हर जरूरी सामान और रानी पद्मिनी की लग्जरी निसान कार भी मिसिंग है। ये जांच में अहम कड़ी साबित हुई। कार को ट्रेस कर पुलिस ने एक हफ्ते के अंदर ही ड्राइवर जपराज (30) और लक्ष्मीनरसिम्हा (33) को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं उनका तीसरा साथी कुक गणेशन (30) भी कुछ दिनों बाद पकड़ा गया।

तीन हत्यारों को सुनाई गई सजा-ए-मौत

इस हाईप्रोफाइल डबल मर्डर केस को संजीदगी से लेते हुए चेंगलपट्टू के डिस्ट्रिक्ट जज ने तीनों हत्यारों को कत्ल करने पर फांसी की सजा सुनाई। हालांकि, कुछ समय बाद ही हाईकोर्ट ने सजा बदलकर उम्रकैद कर दी।

मौत के 30 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार

इस मामले की आखिरी सुनवाई साल 2017 में की गई थी। वॉचमैन लक्ष्मीनरसिम्हा को कोर्ट ने बरी कर दिया, वहीं हत्या के मुख्य आरोपी जपराज की जेल की सजा काटते हुए ही मौत हो गई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरा आरोपी सालों पहले जेल से भाग चुका है, जिसे कभी पकड़ा नहीं जा सका।

अपनी पहली हिंदी फिल्म नहीं देख सकीं रानी पद्मिनी

रानी पद्मिनी की मां हमेशा से चाहती थीं कि वो हिंदी सिनेमा में नाम कमाएं। मौत से चंद महीनों पहले ही ये सपना साकार होने को था। उन्हें सचिन पिलगांवकर, आशा पारेख के साथ हिंदी फिल्म प्रेम संदेश मिली थी, जिसकी शूटिंग भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन अफसोस रानी पद्मिनी और उनकी मां ये फिल्म नहीं देख सकीं। फिल्म को रानी पद्मिनी की मौत के 2 साल बाद 1988 में रिलीज किया गया था।


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