
बालोद। परिवार मे तनाव और बिखराव की स्थिति क्यों बनती जा रही है इस विषय को लेकर संत ऋषभ सागर का 5 दिवसीय शिविर महावीर भवन में चल रहा है।
शिविर के प्रथम दिन उन्होने कहा कि परिवार में सभी सदस्यों की मानसिक स्थिति अलग अलग होती है। उसे समझे बिना उनकी मानसिकता के विपरीत अपने विचार या प्रभाव उन पर थोपने से उनके मन मे नकारात्मक भावो की वृद्धि होती है। यही नकारात्मक भाव परिवार में तनाव का कारण बनता है। दूसरे हम बिना सोचे समझे परिवार के ही सदस्यों की गलत शब्दों के साथ आलोचना करने लगते हैं। परिवार के सदस्यों के साथ बैठना, उनकी भावनाओं को समझना, इसके लिए हमारे पास समय नही होता। कहने को तो हम कह देते है कि ,सब कुछ परिवार के लिये ही तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जिस चीज की ज्यादा आवश्यकता होती है हम वो दे नही पाते। क्वालिटी टाइम प्रेम, विश्वास, सहयोग आदि से ही परिवार में समन्वय बनाया जा सकता है।
संतश्री ने कहा कि एक माली की तरह परिवार रूपी पौधों को सींच कर मजबूत पेड़ बनाना होगा जिससे कि वह आंधी तूफान का भी सामना कर सके। उन्होंने कहा कि हमे जीवन मे श्रेष्ठ ही नही श्रेष्ठतम चुनना चाहिए जिससे कि समस्यायें आये ही नही और आ भी जाये तो उसका शांतिपूर्वक समाधान निकल आये। उक्त सभी बातों के लिए विचारधारा सकारात्मक होना आवश्यक है।