रूसी तेल न मिला तो भारत में इस रिफाइनरी के अस्तित्‍व पर खतरा, क्‍या अमेरिका से मोलभाव करेगी सरकार?

Updated on 10-02-2026 12:17 PM
नई दिल्‍ली: गुजरात में नायरा एनर्जी की रिफाइनरी के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल की खरीद रोकने की चेतावनी दी है। ऐसा न होने पर 25% एक्‍स्‍ट्रा टैरिफ दोबारा लगाने की धमकी दी है। इस चेतावनी ने जामनगर क्षेत्र की रिफाइनरी के ऑपरेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वामित्व में संभावित बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भले ही नायरा अधिग्रहण के लिए आकर्षक है। लेकिन, रूसी तेल पर वाशिंगटन का कड़ा रुख संभावित खरीदारों को हतोत्साहित कर सकता है। यह अनिश्चितता तब तक बनी रहने की आशंका है जब तक कि कोई ऐसी बड़ी राजनयिक सफलता न मिले जिससे रूस यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दे।

रूस की दिग्‍गज सरकारी ऊर्जा कंपनी रोसनेफ्ट की नायरा में बहुमत हिस्सेदारी है। मॉस्को पर दबाव डालने के प्रयासों के तहत ट्रंप प्रशासन ने रोसनेफ्ट पर सैंक्‍शन लगाए हैं। गुजरात के वाडिनार में स्थित इस रिफाइनरी की क्षमता 2 करोड़ टन सालाना है। यह रिफाइनरी भारत की दूसरी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है। इसे भारी कच्चे तेल (हैवी क्रूड) को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन किया गया है। TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले यह लगभग पूरी तरह से रूसी तेल पर निर्भर थी।

भारत के पास क्‍या है व‍िकल्‍प?

विश्लेषकों का मानना है कि रिफाइनरी की तत्काल परिचालन जरूरतों को देखते हुए भारत वॉशिंगटन के साथ बातचीत करके सीमित मात्रा में रूसी कच्चे तेल के आयात की अनुमति लेने की कोशिश कर सकता है। भारतीय रिफाइनरियों ने पहले ही ऐसी खरीद में कटौती करना शुरू कर दिया है। हालांकि, अगले आठ से दस हफ्तों के लिए बुक किए गए कार्गो के कारण अचानक रोक लगाना संभव नहीं है।
रेटिंग एजेंसी इकरा के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, 'मेरी समझ है कि भारत अभी भी अमेरिका के साथ कुछ मात्रा में रूस से तेल आयात करने के लिए मोलभाव करेगा। खासकर नायरा रिफाइनरी के लिए।'

क्‍या रूसी तेल खरीदता रहेगा भारत?

एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने भी इस विचार को दोहराया। उन्‍होंने कहा कि भारत मुमकिन है कि रूसी तेल खरीदना जारी रखेगा। हालांकि, कम मात्रा में होगा। उनके अनुसार, इससे नई दिल्ली को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू स्तर पर राजनीतिक छवि भी बनी रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापक व्यापारिक जुड़ाव भी उसके ऊर्जा निर्णयों को आकार दे सकता है। पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की योजनाओं के साथ तेल, गैस और एलपीजी का आयात व्यापार की मात्रा को तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है। बदले में भारत पूंजी प्रवाह, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अमेरिकी बाजारों तक बेहतर पहुंच की उम्मीद करता है।

रूसी तेल खरीद पर क्‍या कहते हैं आंकड़े?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत वर्तमान में अपने कच्चे तेल का लगभग एक तिहाई रूस से आयात करता है। दिसंबर 2025 में खरीद घटकर 2.7 अरब डॉलर रह गई। यह तीन साल का सबसे निचला मासिक स्तर था। नवंबर के 3.7 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 27% कम। इस गिरावट के बावजूद 2025-26 में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्‍लायर बना रहा। इसने अप्रैल और दिसंबर के बीच 105.1 अरब डॉलर के कुल आयात का 31.5% हिस्सा लिया।

वॉशिंगटन के साथ बातचीत जारी रहने के साथ नायरा रिफाइनरी का भाग्य इस बात से जुड़ा है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक दबाव और अमेरिका के साथ अपने विकसित होते व्यापारिक संबंधों को कैसे संतुलित करता है।
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