स्मारक दलितों को कैसे बनाते हैं सशक्त? आंबेडकर जयंती पर BJP ने शुरू किया अभियान, फीडबैक पर बनेगी रणनीति

Updated on 15-04-2026 12:59 PM
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दलित स्मारकों के निर्माण या नवीनीकरण ने अनुसूचित जाति (SC) समुदाय को किस हद तक सशक्त बनाया है या बनाएगा? संविधान के शिल्पी डॉ. बीआर आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से चलाए जा रहे एक महत्वाकांक्षी जनसंपर्क अभियान के दौरान यह एक प्रमुख फीडबैक पैमाना होगा। इसके लिए आज यानी बुधवार से 'बस्ती संपर्क अभियान' की शुरुआत पार्टी की ओर से की गई है। इसका उद्देश्य न केवल आंबेडकर की विरासत का स्मरण करना है।

यूपी बीजेपी अपने अभियान के क्रम में हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी पहलों की प्रभावशीलता पर जमीनी स्तर का व्यवस्थित फीडबैक भी इकट्ठा करेगा। यह पहल योगी आदित्यनाथ सरकार के उस फैसले के ठीक बाद आई है, जिसमें राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों में से प्रत्येक में दलित स्मारकों के नवीनीकरण के लिए 1 करोड़ रुपये आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।

भाजपा की रणनीति का हिस्सा

सीएम योगी के इस कदम को भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह एससी मतदाताओं के बीच अपनी पहुंच को और मजबूत करना चाहती है। साथ ही, अगले साल होने वाले बेहद अहम विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) नैरेटिव का मुकाबला करना भी इसका एक उद्देश्य है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के एससी मोर्चा को इस अभियान की अगुवाई करने का ज़िम्मा सौंपा गया है, जिसमें बूथ-स्तर पर लोगों से जुड़ने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि सवर्ण और एससी, दोनों समुदायों के नेताओं से बनी टीमें विभिन्न जिलों में दलित-बहुल इलाकों का दौरा करेंगी। टीमें वहां के निवासियों से सीधे बातचीत करेंगी।

एससी मोर्चा के प्रमुख ने दी जानकारी

भाजपा प्रदेश एससी मोर्चा के प्रमुख राम चंद्र कन्नौजिया ने कहा कि यह अभियान निश्चित रूप से इस बात का आकलन करेगा कि क्या दलित स्मारकों के नवीनीकरण का सामाजिक रूप से वंचित वर्गों पर वास्तव में कोई असर हुआ है? अगर हां, तो किस हद तक। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी कार्यकर्ता स्थानीय मुद्दों पर भी लोगों का फीडबैक लेंगे। समुदाय के कल्याण के लिए आवश्यक अतिरिक्त उपायों की पहचान करेंगे। स्मारकों के निर्माण और नवीनीकरण पर दिया जा रहा यह जोर बीजेपी के दृष्टिकोण में आए एक बदलाव का संकेत है।
इस तरह की प्रतीकात्मक राजनीति पारंपरिक रूप से बसपा प्रमुख मायावती से जुड़ी रही है। मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने दलितों की पहचान को स्थापित करने और उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाने के साधन के तौर पर मूर्तियों, पार्कों और स्मारकों के निर्माण को प्राथमिकता दी थी।

जिला स्तर पर कार्यशालाएं

इस अभियान के तहत जिला-स्तर पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य हाशिए पर पड़े समूहों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाना होगा। शिकायतों के निवारण को योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ जोड़कर भाजपा कल्याणकारी कार्यों को राजनीतिक पूंजी में बदलने का प्रयास कर रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि इस पहल का मकसद जमीनी स्तर पर विपक्ष का मुकाबला करना है। साथ ही, 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक तैयारियों को तेज करना है।

प्रतीकवाद और जमीनी स्तर पर लोगों को लामबंद करने के एक सोचे-समझे मेल के तौर पर देखे जा रहे इस अभियान से भाजपा की उस कोशिश पर जोर मिलता है, जिसके तहत वह पहचान को मान्यता देने की बात कर रही है। साथ ही, विकास-केंद्रित संदेशों को आपस में जोड़कर एससी मतदाताओं के बीच अपना समर्थन मजबूत करना चाहती है।

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