नई दिल्ली: अडानी ग्रुप (Adani Group) ने एयरपोर्ट बिजनस में अगले 10 साल में 60,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। यह राशि नवी मुंबई एयरपोर्ट के पहले चरण में निवेश किए जा रहे 18,000 करोड़ रुपये से अलग है। इन पैसों को एयरपोर्ट्स में रनवे, टैक्सीवे, एयरक्राफ्ट पार्किंग स्टैंड्स और टर्मिनल बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही एयरपोर्ट्स के करीब होटल और शॉपिंग मॉल भी विकसित किए जाएंगे। अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड (APSEZ) के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी का कहना है कि यह पैसा आंतरिक संसाधनों से जुटाया जाएगा। ग्रुप के पास इस समय कुल आठ एयरपोर्ट हैं।
अडानी ने ईटी से कहा, 'मुझे लगता है कि एयर कनेक्टिविटी के मोड में बुनियादी बदलाव होने जा रहा है। देश में कई एयरपोर्ट भविष्य में इंटरनेशनल हब बनने जा रहे हैं। इंटरनेशनल ट्रेवल में भारी बढ़ोतरी होने जा रही है। हम डोमेस्टिक कनेक्टिविटी में सुधार के लिए एयरलाइन कंपनियों के साथ मिलकर काम करेंगे।' उन्होंने कहा कि एयरलाइन बिजनस के प्रॉफिटेबल होने के बाद इसकी लिस्टिंग करने की योजना है। करण अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के बेटे हैं। अडानी ग्रुप को साल 2019 में देश में छह एयरपोर्ट ऑपरेट करने के राइट मिले थे। इनमें लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मेंगलौर शामिल हैं। साल 2021 में अडानी ग्रुप ने मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट को जीवीके ग्रुप से खरीद लिया।
एक अरब प्लस पैसेंजर
इस तरह अडानी ग्रुप के पास इस समय आठ एयरपोर्ट हैं। अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के सीईओ अरुण बंसल ने कहा कि ग्रुप 2040 तक 25 से 30 करोड़ पैसेंजर कैपेसिटी की तैयारी कर रहा है। अभी ग्रुप के सात एयरपोर्ट्स की कैपेसिटी 7.3 करोड़ है। नवी मुंबई एयरपोर्ट अभी बन रहा है। बंसल ने कहा, 'अभी देश की 1.4 अरब की आबादी में से केवल 30 करोड़ लोग ही हवाई यात्रा कर रहे हैं। एयरलाइन कंपनियों ने जिस तरह विमानों के ऑर्डर दिए हैं, उससे लगता है कि 2030 तक देश में विमानों की संख्या 3,000 तक पहुंच जाएगी। अभी देश में करीब 700 विमान हैं। यानी 30 करोड़ पैसेंजर जल्दी ही एक अरब प्लस होने वाले हैं।'