
माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की मान्यता नियम 2017 (संशोधित नियम 2020) इसमें यह उल्लेखित है कि 10वीं तक के स्कूल चार हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में हो ना चाहिए तो 12वीं तक के स्कूल 5600 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में होना चाहिए। साथ ही जमीन का पंजीयन और लाइसेंस संबंधी दस्तावेज होना चाहिए। विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण वर्षों से ये स्कूल बिना कागजों के चल रहे हैं। इन स्कूलों के पास ना तो पर्याप्त कमरे हैं और ना ही मान्यता नियमों का पालन कर रहे हैं। इनके पास जमीन का पंजीयन भी नही है।
डीपीआइ ने सख्त कार्यवाही के दिए आदेश
लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) के पास 30 निजी स्कूलों ने मान्यता नवीनीकरण के लिए अपील लगाई है। वहीं इंदौर के दो स्कूल बिना मान्यता के चल रहे थे। इसके बाद डीपीआई ने सभी संयुक्त संचालकों को निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त हो चुकी है या मान्यता नवीनकृत नहीं हुई है। ऐसे स्कूलों में विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाए और ना ही संचालित किया जाए। इन स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही कर तत्काल अवगत कराया जाए।
अरविंद चौरघड़े, संयुक्त संचालक,भोपाल संभाग
सवाल-बिना दस्तावेज के 40 सालों से स्कूल चल रहे हैं, इसमें विभाग ने अनदेखी की है।
जवाब-विभाग ने कोई अनदेखी नहीं की है।अब इन स्कूलों को भेल ने लाइसेंस व लीज देना बंद कर दिया है। इनके पास कोई दस्तावेज नहीं है।
सवाल-निजी स्कूलों को मान्यता देते समय क्या नियमों का पालन नहीं किया जाता है।
जवाब-मान्यता नियम 2017 (संशोधित नियम 2020) का पालन हर निजी स्कूल को करना होगा।
सवाल-भोपाल संभाग के 30 स्कूलों को किस आधार पर अमान्य किया गया।
जवाब-इन स्कूलाें के पास ना तो जमीन का पंजीकृत किरायानामा है और ना ही जमीन के संबंध में कोई दस्तावेज है।
सवाल-भेल क्षेत्र के चार स्कूल बंद होने से ढाई हजार विद्यार्थियों का क्या होगा।
जवाब-इन स्कूलों के विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
इनका कहना है
भेल क्षेत्र के चार निजी स्कूलों का लाइसेंस की समय-सीमा समाप्त होने के मामले में कोई जानकारी नहीं है। स्कूलों को उनके दस्तावेज निरीक्षण और बच्चों की संख्या के हिसाब से साल भर के लाइसेंस के लिए निर्धारित शुल्क जमा कराया जाता है। इस मामले की जांच कराते हैं
विनोदानंद झा,भेल प्रवक्ता