
कुछ लोग कहते है कि हादसे अचनाक होते हैं,हादसों को रोका नहीं जा सकता,हादसों से बचा नहीं जा सकता। कुछ हादसे ऐसे हो सकते है जिन्हें चाहकर भी रोका नहीं जा सकता।लेकिन ऐसे हादसे जो किसी न किसी की लापरवाही के कारण होते हैं, वह तो रोके जा सकते है। आदमी ही लापरवाह होता है, उसकी लापरवाही के कारण ही हादसे होते हैं। वह लापरवाही न करे तो ज्यादातर हादसे रोके जा सकते हैंं।
लापरवाही कौन करता है, जो सावधान नहीं रहता है, सतर्क नहीं रहता है। हादसे रोकने के लिए हर स्तर पर आदमी को सावधान रहने की जरूरत है। सड़क हादसे मे कोई हादसा करने वाला होता है, हादसा वाहन में किसी खराबी के कारण हो सकता है। हादसे एक या ज्यादा लोगों की मौत होती है। हादसे का कारण ड्राइवर हो सकता है, वह लापरवाह हो सकता है,उसे दूसरे की जान का परवाह नहीं हो सकती,वह नशे में हो सकता है, वाहन में कोई खराबी तो नहीं है, यह जानना भी चालक का काम है।अगर वाहन में कोई खराबी है या खराबी आ सकती है तो ड्राइवर को ऐसा वाहन नहीं चलाना चाहिए।चालक वाहन तेज चला रहा हो।यानी हादसे के लिए चालक भी दोषी होता है।
कई बार चालक की गलती नहीं रहती है। लोग सड़क पर चलते हुए सावधान नहींं रहते है, सड़क पार करते वक्त सजग नहीं रहते हैं। बाइक व कार चलाते वक्त लापरवाही करते हैं। यानी जिसके साथ हादसा होता है कई बार वह भी हादसे के लिए दोषी होता है। कई बार सड़क खराब होने के कारण भी हादसे होते हैं। कई बार लोगो की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का पालन नहीं करने के कराण हादसे होते हैं। यानी ज्यादातर मामल मे आदमी की लापरवाही के कारण ही हादसे होते हैं और आदमी ही मारे जाते हैं, यानी हर रोज लोग हादसे में मारे जाते हैं, उनके मारे जाने के लिए भी आदमी ही दोषी होता है।
बड़ा हादसा हुआ तो उसके पीछे बड़ी लापरवाही होती है। कवर्धा जिले के बारपानी में बंजारी घाट से उतरते वक्त तेंदूपत्ता तोड़कर लौट रहे वाहन के पलटने से १९लोगों की मौत हो गई। माान जा रहा है कि बंजारी घाट से उतरते वक्त वाहन का ब्रेक फेल हो गया और चालक यह जानकर की ब्रेक फेल हो गया वाहन से कुद कर खुद की जान बचा ली और वाहन के गहरी खाई में गिरने के कारण वाहन में सवार ३६ लोगों में से १९ की मौत होना वाकई ब़डी़ दुखद घटना है। तेंदूपत्ता तोड़ने ज्यादातर महिलाएं जाती है इसलिए मरने वालों में १८ महिलाएं हैं। हादसे की खबर मिलने पर संवेदनशील सरकार जो कुछ कर सकती थी, कर रही है। मरने वालों के परिवार व घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा कर दी गई है।सरकार ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।
बड़े हादसे के बाद कोई सबक नहीं लिया जाता है, इसलिए उसी तरह के हादसे, ठीक उसी जगह पर बार-बार होते हैं। सरकार को मालूम है, यातायात विभाग को मालूम है कि हादसे मेें ज्यादा लोग तब ही मारे जाते हैं, जब वाहन में नियम का उल्लंघन कर ज्यादा लोगों को बिठाया जाता है। इस तरह नियमों का पालन पहले तो वाहन चालक को अनिवार्य रूप से करना चाहिए। अगर वह नहीं करता है तो यह सरकार व यातायात व पुलिस विभाग की जिम्मेदारी है कि कानून का पालन करवाए, कानूनी कार्रवाई करे।
कवर्धा हादसे में न तो चालक ने कानून का पालन किया और न ही सरकार व यातायात विभाग पालन करवा सका। यह हुई पहली लापरवाही, यह लापरवाही नहीं हुई होती तो इतने लोगों की जान नहीं जाती।वाहन में बैठने वाले लोगों को समझना था कि इतने लोगों का एक वाहन में बैठना उनकी जान के लिए खतरा है, दूसरी लापरवाही यहां हुई। वाहन का ब्रेक ठीक है या नहीं इसका पता तो चालक को वाहन चलाने के पहले पता होना चाहिए। चालक को ढलान पर पता चलता है कि वाहन का ब्रेक फेल हो गया है और वह अपनी जान कूद कर बचा लेता है और बाकी लोगों को मरने के लिए छोड़ देता है। यह तीसरी लापरवाही है।
प्रदेश के लोगों की जान की सुरक्षा करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। जहां भी बड़ा हादसा हो सकता है या हो चुका है तो सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि ऐसी जगहों की पहचान कर ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि इस तरह की बड़े हादसे फिर न हो। हाल ही इसी तरह दुर्ग जिले में ऐसी घटना हुई थी जिसमें वाहन के खाई में गिरने से कई लोगों की मौत हुई थी।
केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार हो या उनका सड़को जुड़ा विभाग ऐसी तमाम खाई वाली जगहों पर या तो मजबूत रेलिंग लगाए, मजबूत दीवार बनवाए। ताकि कोई भी वाहन खाई में तो न गिरे। राज्य व केंद्र सरका हर साल हादसे रोकने के लिेए कई तरह के प्रयास करते हैं। मगर हादसे रोकना सिर्फ उनकी ही जिम्मेदारी नहीं है। यह सामूहिक जिम्मेदारी है। हादसे तब ही रुकेंगे जब सभी लोग सभी स्तर प्रयास करेंगे। किसी तरह का लापरवाही नहीं करेंगे, सावधान रहेंगे जितनी अपनी जान के प्रति रहते है,उतना ही दूसरो की जान के प्रति भी सावधान रहें।