
भोपाल। कोरोना महामारी के समय जब सब-कुछ बंद था, तब सबसे बड़ा संकट उस वर्ग पर आया जो फुटपाथ पर दुकान लगाकर या फेरी लगाकर जीवनयापन करता था। इन्हें फिर अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (स्वनिधि) योजना प्रारंभ की। यह केवल शहरी क्षेत्रों के लिए थी, लेकिन संकट ग्रामीण क्षेत्रों में भी कम नहीं था। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना लागू की।
इन दोनों योजनाओं से अब तक मध्य प्रदेश के लगभग 13 लाख पथ विक्रेताओं ने स्वयं का व्यवसाय पुन: स्थापित किया। हाल ही में मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने रोजगार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में 67 हजार 166 हितग्राहियों को 113 करोड़ 44 लाख रुपये के ऋण स्वीकृति पत्र जारी किए। यह राशि बिना ब्याज के दी जा रही है और वापस लौटाने पर फिर ऋण लेने की पात्रता है।
कोरोना महामारी में बुरी तरह प्रभावित हो चुके पथ विक्रेताओं के कारोबार को फिर स्थापित करने के लिए राशि की आवश्यकता थी। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री ने बिना ब्याज के बैंकों से कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना लागू की। इसमें एक वर्ष की अवधि के लिए बिना किसी गारंटी के दस हजार रुपये दिए जाते हैं।
समय पर इस राशि का भुगतान करने पर बीस और फिर पचास हजार रुपये तक उपलब्ध कराने का प्रविधान है। प्रदेश में अब तक आठ लाख से अधिक शहरी पथ विक्रेताओं को 1800 करोड़ रुपये का ऋण दिलाया जा चुका है।
उल्लेखनीय बात यह है कि केंद्र सरकार ने योजना के पहले चरण में मध्य प्रदेश को 31 मार्च 2023 तक पांच लाख 20 हजार पथ विक्रेताओं को लाभ देने का लक्ष्य दिया था, जिसे नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने ढाई माह पूर्व जनवरी में ही प्राप्त कर पांच लाख 20 हजार 187 पथ विक्रेताओं को 10-10 हजार रुपये का ब्याज मुक्त कार्यशील ऋण दे दी। दूसरे चरण में एक लाख 23 हजार 261 आवेदकों को 20-20 हजार रुपये और तीसरे चरण में चार हजार 503 आवेदकों को 50-50 हजार रुपये का ऋण उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराया गया।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना के पात्र आवेदक 14 लाख 19 हजार 799 हैं। इनमें से 11 लाख 75 हजार 560 को तीन चरणों में लाभांवित किया जा चुका है। एक फरवरी 2024 को ही प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में 67 हजार 166 हितग्राहियों को 113 करोड़ 44 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
इसका सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि पथ विक्रेता अपने व्यवसाय को बढ़ा रहे हैं। जिन्हें पहले दस हजार रुपये मिले थे, उन्होंने उसे जमा बीस से लेकर 50 हजार रुपये तक का ऋण ले लिया है। इससे जहां पथ विक्रेता आत्मनिर्भर हुए, वहीं प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।
जुलाई 2020 से प्रदेश सरकार ने अपने बजट से ग्रामीण क्षेत्रों के पथ विक्रेताओं को फिर से पैरों पर खड़ा करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने केंद्र सरकार की तर्ज पर मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ-विक्रेता योजना लागू की थी। इसमें भी दस हजार रुपये तक बैंकों से ऋण दिलाने का प्रविधान है। योजना में अब तक तीन लाख 38 हजार से अधिक हितग्राही लाभांवित हो चुके हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना निश्चित तौर पर अच्छी है पर बैंकों से प्रकरण समय पर स्वीकृत होना चाहिए। इसको लेकर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति में भी कई बार बात उठ चुकी है। वहीं, बैंक प्रबंधन समय पर ऋण नहीं लौटने से परेशान हैं।
दरअसल, सरकार की गारंटी पर बैंक ऋण तो दे देते हैं पर जब राशि समय पर वापस नहीं मिलती है तो आगे प्रकरण स्वीकृत करने में परेशानी आती है। यही कारण है कि सरकार भी नियमित ऋण वापसी के लिए हितग्राहियों को प्रोत्साहित करती है ताकि क्रम बना रहे है और जरूरतमंद को सहायता मिलती रहे।